
- शरद मिश्रा
चित्रकूट। भगवान राम को ‘आश्रय’ देने वाले ‘महर्षि वाल्मीकि’ का आश्रम, जहां सीता ने ‘लव-कुश’ को ‘जन्म’ दिया और जहां बैठकर महर्षि ने ‘रामायण’ लिखी, वह पावन ‘लालापुर अब नई पहचान’ पाने जा रहा है। तमसा गंगा के ‘तट’ पर बसे इस ऐतिहासिक आश्रम के ‘कायाकल्प’ के लिए 905.08 लाख रुपये यानी 9 करोड़ 5 लाख रुपये की ‘बड़ी परियोजना’ को ‘मंजूरी’ मिल गई है।
स्वीकृत योजना के तहत तामसा गंगा पर भव्य वाल्मीकि ‘घाट का निर्माण’ होगा, साथ ही पथ प्रकाश, श्रद्धालुओं के बैठने के लिए बेंच, टीन शेड, पेयजल और ‘सम्पूर्ण पर्यटक सुविधाएं विकसित’ की जाएंगी।
यही वह तपोभूमि है जहां महर्षि वाल्मीकि ने ‘तपस्या’ की थी, यहीं तामसा गंगा के ‘तट’ पर ‘क्रौंच वध’ देखकर उनके मुख से पहला ‘श्लोक’ फूटा था और ‘रामायण की रचना’ हुई थी। इसीलिए यह परियोजना सिर्फ घाट का निर्माण नहीं, बल्कि आस्था, अध्यात्म, इतिहास और पर्यटन को ‘एक मंच पर जोड़ने’ की ‘बड़ी पहल’ मानी जा रही है।
परियोजना को लेकर मानिकपुर विधायक अविनाश द्विवेदी, जिलाधिकारी पुलकित गर्ग और पुलिस अधीक्षक ने संयुक्त रूप से प्रस्तावित स्थल का स्थलीय निरीक्षण कर विकास कार्यों की समीक्षा की। जिलाधिकारी ने साफ निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी और सभी कार्य स्वीकृत आगणन, निर्धारित मानकों और उच्च गुणवत्ता के साथ समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं।
राम की तपोभूमि चित्रकूट में अब तक मंदाकिनी के घाट ही ‘पर्यटन का केंद्र’ थे, लेकिन इस ‘परियोजना के धरातल पर उतरने’ के बाद महर्षि वाल्मीकि आश्रम और तामसा गंगा का पावन तट ‘आस्था और इको-टूरिज्म’ के ‘नए केंद्र के रूप’ में उभरेगा, जिससे लालापुर की ‘तस्वीर’ बदलेगी और ‘पर्यटन की तकदीर’ भी।
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