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October 11, 2026
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सढा-गोरेमऊ मार्ग पर 'जिंदगी' का 'दांव' : जिम्मेदारों का नहीं 'ध्यान'
उत्तर प्रदेशबुंदेलखंड

सढा-गोरेमऊ मार्ग पर ‘जिंदगी’ का ‘दांव’ : जिम्मेदारों का नहीं ‘ध्यान’

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। तहसील नरैनी के ‘सढा से गोरेमऊ’ जाने वाली ‘सड़क आज सरकार के विकास के तमाम दावों की कलई खोल’ रही है। कई सालों से इस ‘सड़क की हालत बद से बदतर’ होती जा रही है, लेकिन ‘जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि कुंभकर्णी नींद’ में हैं। इस मार्ग की स्थिति यह है कि ‘यहां गड्ढों में सड़क ढूंढनी पड़’ रही है। बरसात में तो हालात और भी ‘भयावह’ हो जाते हैं।

सढा-गोरेमऊ मार्ग पर 'जिंदगी' का 'दांव' : जिम्मेदारों का नहीं 'ध्यान'जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे, कीचड़ और पानी भरा रहता है। आए दिन ‘दोपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल’ हो रहे हैं। गर्भवती महिलाओं और मरीजों को अस्पताल ले जाने में घंटों लग जाते हैं। स्कूल जाने वाले ‘बच्चों का भविष्य भी इसी टूटी सड़क पर दांव’ पर लगा है। यह सड़क क्षेत्र के ‘लगभग दो दर्जन से अधिक गांवों के लिए जीवन रेखा’ है। सढा, गोरेमऊ और आसपास के गांवों के लगभग 1 लाख से अधिक लोग ‘इसी एकमात्र मार्ग पर निर्भर’ हैं। बाजार, तहसील, अस्पताल और जिला मुख्यालय जाने के लिए ग्रामीणों के पास यही एक रास्ता है।

सढा-गोरेमऊ मार्ग पर 'जिंदगी' का 'दांव' : जिम्मेदारों का नहीं 'ध्यान'लेकिन इस ‘रास्ते पर सफर करना किसी सजा से कम नहीं’ है। भारी वाहनों के गुजरने पर ‘धूल का गुबार और छोटे वाहनों के उछलने’ से लोग परेशान हैं। सबसे दुखद बात यह है कि ‘चुनाव के समय नेता बड़े-बड़े वादे करके वोट’ मांगते हैं। गांव-गांव जाकर ‘विकास की गंगा बहाने’ की बात होती है। लेकिन ‘चुनाव खत्म’ होते ही ‘सड़क और यहां के लोग सब भूल’ जाते हैं। जनता टैक्स देती है, वोट देती है, लेकिन बदले में उसे मिलते हैं सिर्फ गड्ढे और दुर्घटनाएं।

सढा-गोरेमऊ मार्ग पर 'जिंदगी' का 'दांव' : जिम्मेदारों का नहीं 'ध्यान'अब प्रश्न यह है कि आखिर इस सड़क के ‘निर्माण और मरम्मत’ के लिए ‘आवंटित बजट’ जाता कहां है? क्या 1 लाख वोटरों की जान की कोई कीमत नहीं है? कब तक आमजन इस बदहाली को झेलता रहेगा ? जनता अब जवाब मांग रही है। संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों को तुरंत संज्ञान लेकर इस सड़क का स्थाई समाधान निकालना होगा, वरना आने वाले समय में इसका खामियाजा उन्हें ही भुगतना पड़ेगा।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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