
- विनोद मिश्रा
बांदा। समाजवादी पार्टी बांदा ‘सदर विधान सभा सीट’ गठबंधन के तहत ‘कांग्रेस’ को दे सकती है। क्योंकि इस ‘सीट’ पर कांग्रेस ‘चार बार जीत’ चुकी है।
सपा नें कभी इस सीट पर ‘जीत का स्वाद’ नहीं ‘चखा’। पिछले दो चुनावों से भाजपा के प्रकाश द्विवेदी ‘जीत’ रहे हैं जिनकी स्थिति ‘तीसरी बार’ भी ‘अत्यधिक मजबूत’ है।
अपने क्षेत्र में यह ‘अति लोकप्रिय’ हैं। जनता भी ‘जय प्रकाश तय प्रकाश’ को दिलों में ‘गहराई’ तक बैठाये है। इनके ‘अभेद्य किले’ को तोड़ना ‘लोहे के चने चबाना’ सा माना जाता है।
खैर, सपा एवं कांग्रेस के ‘नये समीकरणों’ की इस ‘सुगबुहावट’ से कांग्रेस की अंदरूनी राजनीतक सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस यहां से क्षत्रिय ब्रह्मण प्रत्याशी उतार सकती है ! सपा के उच्च विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो प्रदेश स्तर पर बांदा एवं नरैनी सीट गठबंधन धर्म में कांग्रेस को देने पर मनन मंथन प्रस्तावित है।
सूत्रों की मानें तो इस ‘बिंदु’ पर भी ‘विचार’ चल रहा है की कांग्रेस के प्रत्याशी को ‘सपा’ अपने ‘सिंबल’ पर लड़ाये। ‘गठबंधन’ में बांदा सदर सीट यदि ‘कांग्रेस को मिलती है औऱ ब्रह्मण प्रत्याशी लड़ना तय होता है तो ‘टिकट हासिल’ करने में कांग्रेस में ‘तीन ही चेहरे’ हैं।
पहला ‘जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित, पूर्व जिलाध्यक्ष प्रद्युम दुबे लालू एवं साकेत बिहारी मिश्रा’ हैं। कांग्रेस के पास ‘मजबूत क्षत्रिय चेहरे का अभाव’ है। इसमें एक पूर्व विधायक के बेटे का नाम भी चर्चा में है ! इसमें प्रद्युम दुबे पूर्व सांसद भीष्म देव दुबे के ‘पुत्र’ हैं। कांग्रेस के सांसद नेहरू परिवार के नजदीकी राजीव शुक्ला के भी निकट संबंधी हैं ! साकेत बिहारी मिश्रा कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं।
दूसरी ओर ‘सपा से सदर सीट’ से चुनाव लड़ने का ‘मन’ विदित त्रिपाठी के अलावा महेंद्र सिंह गौतम,अनमोल जडिया तथा स्वयं जिलाध्यक्ष मधुसूदन कुशवाहा ‘नजर गड़ायें’ हैं। इसके अलावा बाबू सिंह कुशवाहा की पत्नी सुकन्या कुशवाहा की भी नाम प्रस्तावित था। कुछ सपा के ‘क्षत्रिय चेहरे कांग्रेस में जानें की जुगाड़’ में है इसमें एक ‘पूर्व विधायक के पुत्र का नाम भी चर्चा’ में है। इन हलातों में यदि ‘बाजी कांग्रेस की लाल हो गई तो इन सबके मंसूबों पर पानी फिर’ सकता है।
हालांकि ‘सपा मुखिया अखिलेश यादव गठबंधन में सदर सीट कांग्रेस’ को देंगे इससे जिला स्तर पर दोनों पार्टियों के अध्यक्ष ऐसी किसी ‘स्पष्ट जानकारी होंने से इंकार’ करते हैं, लेकिन ‘सपा के बड़े सूत्र’ के अनुसार इस दिशा में विचार मंथन की प्रक्रिया ‘अंतिम दौर’ में चल रही है, अंतिम निर्णय सपा की ‘सर्वे रिपोर्ट’ पर ‘मनन के बाद जल्द’ ले लिया जायेगा।
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