
- शरद मिश्रा
बांदा। किसान के लिए ‘पानी ही जान’ है। और इस बार ‘केन कैनाल’ ने वही ‘जान रोक’ दी। गिरवां में ‘नहर की झाल’ की ‘दीवार टूटने’ से 1000 बीघा ‘धान की रोपाई संकट’ में पड़ गई है। गिरवां बस स्टॉप के पास ‘केन कैनाल पर नया पुल’ बन रहा है। पुल तोड़ते समय नहर की झाल की दीवार भी टूट गई।
ये दीवार नहर में पानी रोकती थी। अब नहर में पानी का स्तर इतना नीचे है कि दुर्गापुर, सरसवाल, गिरवां, गढ़ी चांदपुर, पतराहा के 1 से 1.5 हजार बीघा खेतों तक पानी नहीं पहुंच रहा। किसानों ने कर्ज लेकर धान की नर्सरी तैयार की थी। अब नर्सरी खेत में जाने के बजाय पीली पड़ रही है। किसान भुवनेश, सत्येंद्र तिवारी, दीपक, महेंद्र, राजेश का कहना है “ऊपर से बारिश नहीं, नीचे से नहर नहीं। हम जाएं तो कहां जाएं?”
रोपाई का समय 15 जुलाई तक है। देर हुई तो 5-6 महीने वाली धान की फसल नहीं लग पाएगी। किसानों ने डीएम से शिकायत की। डीएम के आदेश पर नहर में प्लेटें लगाकर पानी रोकने का काम चल रहा है, पर अभी तक पूरा नहीं हुआ। किसानों का कहना है पुल बने, लेकिन पहले खेत को पानी दो। वरना पुल बनते-बनते किसान की साल भर की मेहनत बर्बाद हो जाएगी।
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