
- विनोद मिश्रा
बांदा। जिले में एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) का संकट अब ‘खतरनाक स्तर’ पर पहुंच गया है। समय पर ऋण न चुका सके 20 हज़ार से अधिक किसानों और व्यापारियों को बैंकों ने 402 करोड़ रुपये के बकाया की नोटिस थमा दी है। दो वर्ष पूर्व एनपीए घोषित हुए ये खाते अब बैंकिंग तंत्र पर बोझ और ऋणग्रस्त परिवारों पर संकट बनते जा रहे हैं।

जिले में बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, एसबीआई, केनरा सहित सरकारी निजी कुल 17 बैंक संचालित हैं। इनकी लगभग 100 शाखाओं में लाखों खाताधारक ऋण योजनाओं के जरिए जुड़े हैं। कृषि क्षेत्र में जारी 2,32,500 किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से 2,906 करोड़ रुपये वितरित किए गए। चार प्रतिशत वार्षिक ब्याज पर किसानों को कर्ज की सुविधा भी दी गई, लेकिन हालात इतने बिगड़े कि 20,821 किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड खाते एनपीए की श्रेणी में पहुंच गए। एनपीए बढ़ने से चिंतित बैंकों ने अब वन टाइम सेटलमेंट योजना लागू कर दी है।

एलडीएम रवि शंकर के अनुसार ‘एनपीए’ खातों पर 402 करोड़ का बकाया है। ओटीएस योजना सबके लिए अवसर है। जो भी लोक अदालत में आवेदन करेगा, उसके खाते का जल्द निस्तारण कर छूट दी जाएगी। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना, मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग योजना और मुद्रा लोन के 6305 खाताधारकों के खाते भी एनपीए हो चुके हैं। इन्हें भी नोटिस भेजकर लोक अदालत में समाधान का अवसर दिया गया है।
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