– विनोद मिश्रा
बांदा । बुंदेलखंड में खेत-तालाब की सफलता के बाद अब बहुउद्देश्यीय तालाब बनाए जाएंगे। जिनमें जल संरक्षण व सिचाई के साथ ही मछली पालन व सिघाड़ा की खेती होगी। इसके लिए एक समन्वित परियोजना बनाई गई है। जिसमें पांच सालों में पांच सौ करोड़ रुपये खर्च कर जल बंधा निर्माण के अलावा खेती प्रणाली का विकास किया जाना है।

बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय किसान मेले में आए प्रदेश के कृषि निदेशक डॉ.एपी श्रीवास्तव ने कहा कि बुंदेलखंड की कृषि प्राथमिक अवस्था में है। यहां पहले से ही जैविक खेती होती रही है। लेकिन अब हम जैविक उत्पादों की व्यावसायिक व्यवस्था कर बाजार देंगे। इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी। बुंदेलखंड में खेती प्रणाली के विकास के लिए पांच सौ करोड़ की एक समन्वित परियोजना देने जा रहे हैं। जिसमें जल संचयन को ढालदार स्थानों में बंधा बनाएंगे। इनमें पानी एकत्र होकर झील का रूप लेगा। इन बंधों से सिचाई के साथ मछली पालन जैसे काम किए जा सकेंगे। वहीं खेत तालाब की सफलता को देखते हुए अब बहुउद्देश्यीय तालाब बनाएंगे। इन तालाबों से किसान सिचाई करेंगे। वहीं मोती, सिघाड़ा की खेती कर मछली पालन का भी काम करेंगे। समन्वित परियोजना में नीबू वर्गीय फल उत्पाद, स्ट्राबेरी की खेती सहित, ड्रेगन फ्रूट, बकरी पालन व चारा उत्पादन के काम भी शामिल किए जाएंगे। कृषि निदेशक ने कहा कि बुंदेलखंड में खेत-तालाब योजना बेहद सफल रही। इनसे जहां खेती का काम हो रहा है वहीं जानवरों के लिए पानी की व्यवस्था भी हो गई है और अब जानवरों को पानी की समस्या के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )


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