
- विनोद मिश्रा
बांदा। चित्रकूट मंडल में अब इलाज के नाम पर मौत बेची जा रही है। यहां नकली दवा माफिया का ऐसा नेटवर्क सक्रिय है जो राजस्थान, उत्तराखंड और हिमाचल से निकलकर आगरा-लखनऊ की मंडियों होते हुए बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर और महोबा तक जहर पहुंचा रहा है। दवा व्यापार से जुड़े सूत्रों का दावा है कि बाजार में बिकने वाली करीब 40 फीसदी दवाएं नकली हैं। यानी हर 10 मरीजों में से 4 मरीज अनजाने में जहर खा रहे हैं।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग एफएसडीए की अपनी जांच रिपोर्ट में भी इस अंतरराज्यीय गिरोह का जिक्र है। रिपोर्ट के मुताबिक नकली दवाओं की बड़ी खेप पहले राजस्थान और हिमाचल की फैक्ट्रियों में तैयार होती है। वहां से ये माल आगरा और लखनऊ की थोक दवा मंडियों में पहुंचता है। यहीं से इसकी पैकिंग बदलकर चित्रकूट मंडल की चारों जिलों की मंडियों में सप्लाई की जाती है। यहां से छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों के मेडिकल स्टोरों तक ये दवाएं पहुंचाई जाती हैं। कई बार पकड़े जाने के डर से गिरोह कोरियर और प्राइवेट वाहनों से सीधे महानगरों तक माल भेज देता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग की कार्रवाई सिर्फ कागजों और दिखावे तक सीमित है। जब टीम सक्रिय होती है तो सप्लाई बंद हो जाती है और टीम के हटते ही नेटवर्क फिर शुरू। सूत्रों का कहना है कि चित्रकूट मंडल माफिया के लिए सबसे मुफीद है क्योंकि यहां से यूपी के साथ-साथ एमपी की सीमा भी लगी है।
जरूरत पड़ने पर माल इधर-उधर किया जा सकता है। चिकित्सकों का कहना है कि सबसे ज्यादा नकली एंटीबायोटिक, शुगर, बीपी, दर्द निवारक और जीवनरक्षक दवाएं बाजार में खप रही हैं। मरीज महंगी दवा खरीदकर खा रहे हैं लेकिन बीमारी ठीक नहीं हो रही। कई बार हालत बिगड़ने पर भी डॉक्टरों को समझ नहीं आ रहा कि दवा असली है या नकली।
ग्रामीण इलाकों में स्थिति और खराब है। झोलाछाप डॉक्टर और छोटे मेडिकल स्टोर सस्ती नकली दवा बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। गरीब मरीज इलाज के चक्कर में दोहरी मार झेल रहा है। एक तरफ बीमारी और दूसरी तरफ नकली दवा का साइड इफेक्ट। सरकार को चाहिये की इस गिरोह के खिलाफ एसटीएफ और ड्रग कंट्रोल की संयुक्त टीम बनाकर अभियान चलाए। दवा मंडियों में हर खेप की बारकोड स्कैनिंग और रैंडम सैंपलिंग अनिवार्य की जाए। दोषी पाए जाने वाले मेडिकल स्टोरों का लाइसेंस निरस्त कर जेल भेजे। यदि समय रहते इस “जहर के नेटवर्क” को नहीं तोड़ा गया तो चित्रकूट मंडल ही नहीं बल्कि पूरे बुंदेलखंड की सेहत दांव पर लग जायेगी !
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