
- विनोद मिश्रा
बांदा। तिंदवारी विधान सभा हेतु समाजवादी में विधानसभा टिकट के लिये अभी से ‘राजनीति की शतरंज बिछ’ गई है। टिकट की दावेदारी में इस पार्टी से प्रमुख रूप से तीन दावेदारों के नाम चर्चा में हैं।
विशंभर निषाद एवं अशोक सिंह गौर। तीसरा नाम दीपा सिंह गौर का हैं जों अशोक सिंह गौर की पत्नी औऱ तीन बार डीडीसी रह चुकी हैं। जहां तक विशंभर निषाद की बात हैं वह तीन बार इस क्षेत्र से विधायक एवं मंत्री दो बार के सांसद औऱ वर्तमान में संगठन के राष्ट्रीय महासचिव हैं। वहीँ अशोक सिंह गौर भी सपा के जुझारू नेता छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष एवं पार्टी की जिला इकाई के अलावा प्रदेश इकाई में भी पद संभाल चुके हैं। अपने गांव पिपरहरी के प्रधान भी रह चुके हैं।
इनकी पत्नी दीपा सिंह गौर नें अपने तीन वर्षीय डीडीसी कार्यकाल में विकास कार्यों की लंबी श्रंखला खड़ी की हैं। सपा नें 2017 में इन्हें विधान सभा का टिकट दिया था बाद में यह सीट सपा नें कांग्रेस गठबंधन के लिये छोड़ दी थी। दीपा सिंह को पार्टी नें जिला पंचायत अध्यक्ष का भी टिकट दिया लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया था। अब वह महिला कोटे के तहत तिंदवारी से टिकट मांग रही हैं।
कुल मिलाकर टिकट तो औऱ भी सपाई चाहते हैं लेकिन ‘मुख्य रूप से इन तीन नामों पर ही चर्चा’ हैं। विशंभर निषाद के टिकट के लिये सबसे बड़ी मुसीबत इस क्षेत्र से भाजपा विधायक एवं जलशक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद हैं। मंत्री की निषाद बिरादरी में ‘मजबूत पकड़’ हैं उनका ‘टिकट भी लगभग पक्का’ हैं।
ऐसी स्थिति बनने पर विशंभर निषाद की जातीय आधार पर दावेदारी कमजोर हो सकती है? इन राजनीतिक परिस्थितयों में समय आने पर टिकट की लाटरी इनमें किसकी खुलती है यह लोगों में उत्सुकता अभी से है।
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