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चित्रकूट का 'वाटर पार्क' क्यों बन गया केमिकल 'बर्निंग कुंड' हुआ खुलासा ? प्रशासनिक लापरवाही उजागर !
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चित्रकूट का ‘वाटर पार्क’ क्यों बन गया केमिकल ‘बर्निंग कुंड’ हुआ खुलासा ? प्रशासनिक लापरवाही उजागर !

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

चित्रकूट। जिला मुख्यालय का ‘न्यू वाटर पार्क’ क्यों केमिकल कुंड बन गया इसका चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यहां जल के नियमित कई बार जांच होने के सारे मानक संचालक के ठेंगे पर हैं ! औऱ कथित तौर पर लापरवाह प्रशासन संचालक के साथ ‘इलू इलू’ की भूमिका में हैं !

चित्रकूट का 'वाटर पार्क' क्यों बन गया केमिकल 'बर्निंग कुंड' हुआ खुलासा ? प्रशासनिक लापरवाही उजागर !नियम कहते हैं कि वाटर पार्क के पानी का पीएच मान 7.2 से 7.8 के बीच हो और अवशिष्ट क्लोरीन 1.0 से 3.0 पीपीएम रहे। टर्बिडिटी इतनी कम हो कि पूल के सबसे गहरे हिस्से में 150 मिमी की काली डिस्क साफ दिखे। टीडीएस 1500 पीपीएम से नीचे और क्षारीयता 80 से 120 पीपीएम होनी चाहिए। जांच पार्क खुलने से पहले, दोपहर की भीड़ में और बंद होने के बाद कुल 3 से 4 बार अनिवार्य है। पर वाटर पार्क में टेस्ट किट पर धूल जमी है। केमिस्ट का अता-पता नहींसंचालक अंदाजे से ड्रम भर केमिकल पानी में उड़ेल देता है। लाइफगार्ड सिर्फ टिकट चेक करने में मस्त हैं।

चित्रकूट प्रशासन देखेगा चिंताओं की ज्वाला: न्यू वर्ड वाटर पार्क मौत का बन रहा दहकता कुंड ?स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पालिका और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की संचालक से ‘सेटिंग’ है। इसीलिए कई शिकायतों के बाद भी सैंपल लेने कोई नहीं पहुंचा। एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ‘ऊपर से फोन आ जाता है कि कार्रवाई मत करना। महीने की बंधी’ है।

चित्रकूट प्रशासन देखेगा चिंताओं की ज्वाला: न्यू वर्ड वाटर पार्क मौत का बन रहा दहकता कुंड ?त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. एस के वर्मा कहते हैं, लगातार ऐसे पानी के संपर्क में आने से एक्जिमा, स्किन कैंसर और आंखों की कॉर्निया डैमेज हो सकती है। बच्चों के लिए तो यह जहर है। अगर पीएच 8 से ऊपर और क्लोरीन 5 पीपीएम पार कर गई तो 10 मिनट में त्वचा जलने लगेगी।

'मस्ती का जहर' बांट रहा चित्रकूट का वी वर्ड वाटर पार्क: क्लोरीन की ओवरडोज से सड़ रही त्वचा !लोगों की मांग है कि ‘वाटर पार्क को तुरंत सील कर पानी की लैब जांच’ कराई जाए। रोजाना की टेस्ट रिपोर्ट गेट पर चस्पा हो। जांच न करने वाले अफसरों और संचालक पर आपराधिक केस दर्ज हो। वरना यह ‘वाटर पार्क’ आने वाले दिनों में ‘अस्पताल पार्क’ बन जाएगा। अब प्रश्न सीधा यह है की जब गाइडलाइन साफ है कि नहाने का पानी गंगा जैसा साफ हो, तो चित्रकूट के लोगों को तेजाब में क्यों नहलाया जा रहा है?

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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