- विनोद मिश्रा
बांदा। नवरात्र जैसे महापर्व पर जगत जननी मां जगदंबे के दरबार में मत्था टेकने वालों की लंबी फेहरिस्त रही। नवरात्र की अष्टमी पर मंगलवार को भोर से ही देवी भक्तों का मंदिरों में पहुंचना शुरू हो गया। जलाभिषेक और पूजन अर्चन करने के बाद सैकड़ों की संख्या में मौजूद महिला श्रद्धालुओं ने मातारानी के दरबार में अठवाइयां चढ़ाईं और पूजन-अर्चन किया। तमाम श्रद्धालुओं ने मन्नत पूरी होने पर दंडवती परिक्रमा की। श्रद्धा के सैलाब के आगे कोरोना महामारी का खौफ श्रद्धालुओं पर नजर नहीं आया। इतना जरूर रहा कि महिलाओं ने अपने साड़ी के पल्लू को ही मास्क बनाकर बांध लिया था। इससे काफी हद तक तक बचत होती रही।
नवरात्र भर देवी भक्त माता रानी का व्रत रखते हुए पूजन-अर्चन करते हैं। तमाम श्रद्धालुओं ने नवरात्र का व्रत भी रखा। व्रत रखने वाले श्रद्धालु देवी मंदिरों या फिर घरों में रहकर पूजन-अर्चन करते हैं।

मंगलवार को नवरात्र की अष्टमी की भोर से ही श्रद्धालुओं का शहर के महेश्वरी देवी मंदिर, काली देवी मंदिर में रेला पहुंच गया। जगत माता के गगनभेदी जयघोष गुंजायमान हो उठा। घंटा घड़ियाल गूंज उठे। मंदिर पहुंची महिला श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक और पूजन अर्चन करने के बाद मातारानी को आठवाइयां चढ़ाई। अठवाइयां चढ़ाने के बाद नारियल फोड़ा और पूजा खत्म करने के बाद अपने घर के लिए रवाना हो गए। इधर, तमाम श्रद्धालुओं ने मन्नत पूरी होने के बाद जगत माता के दरबार में दंडवती परिक्रमा लगाई। इसके साथ ही अपनी श्रद्धा के मुताबिक मातारानी के दरबार में चढ़ौना भी चढ़ाया। शहर की काली देवी मंदिर और महेश्वरी देवी मंदिर के अलावा मरहीमाता मंदिर, सिंहवाहिनी मंदिर, कलका देवी, महामाई, चैसठ जोगिनी ममंदिर में भ्ी अठवाईं चढ़ाने और पूजन-अर्चन का सिलसिला चलता रहा। घरों और मंदिरों में आस्थावानों ने कन्याओं की पूजा कर उन्हें खीर-पूड़ी खिलाई। मन्नत पूरी होने पर कई श्रद्धालुओं ने घंटा भी चढ़ाया। शाम तक देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ जमा रही। नाइट कफ्र्यू का समय शुरू होने से पहले ही श्रद्धालु देवी मंदिरों से अपने घरों की ओर चले गए।

– ग्रामीण क्षेत्रों में चला कन्याभोज का दौर
बांदा। शहर की अपेक्षा गांवों में नवरात्र महोत्सव बहुत ही विधिवत तरीके से मनाया जा रहा है। नवरात्र की अष्टमी पर गांवों में देवी मंदिरों में गांव की सैकड़ों महिलाओं का हुजूम जमा रहा। वहां पर मंदिरों में ही कन्या भोज कराए जाने का सिलसिला जारी रहा। नवरात्र में पूरे नौ दिनों तक तमाम मंदिरों में कन्या भोज का सिलसिला चला। अष्टमी के दिन कन्या भोज में कन्याओं को खीर और पूड़ी का प्रसाद वितरण किया गया। कन्याओं ने भरपेट भोज किया। मान्यता है कि कन्याएं देवी का स्वरूप होती हैं। इसलिए श्रद्धालु व्रत रखकर न सिर्फ पूजा करते हैं बल्कि कन्या भोज भी कराते हैं। लोगों की मान्यता है कि व्रत रखने के बाद अगर कन्या भोज नहीं कराया तो व्रत पूर्ण नहीं माना जाता है। इसको लेकर कन्या भोज का सिलसिला बहुत तेजी के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में चलता रहा।

– मंदिरों के बाहर तैनात रही पुलिस
बांदा। कोरोना गाइड लाइन को ध्यान में रखते हुए काली देवी मंदिर और महेश्वरी देवी मंदिरों के बाहर पुलिस कर्मियों को भी तैनात किया गया था। पुलिस कर्मियों को सख्त हिदायत दी गई है कि सोशल डिस्टेंसिंग का हर हाल में पालन कराया जाए। पुलिस कर्मियों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने का पूरा प्रयास किया, लेकिन महिला श्रद्धालुओं की भीड़ अधिक हो जाने के कारण सिपाही भी किनारे खड़े हो गए। इतना जरूर रहा कि दूर से ही पुलिस कर्मी श्रद्धालुओं को कोरोन गाइड लाइन का पालन करने की हिदायत देते रहे। लेकिन पूरी तरह से कोरोना गाइड लाइन का पालन नहीं हो सका।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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