
- शरद मिश्रा
बांदा। कटरा कालिंजर गांव में जल संस्थान का चौंकाने वाला कारनामा सामने आया है। यहां एक नलकूप पिछले 10 वर्षों से बंद पड़ा है, लेकिन कागजों पर तैनात दो कर्मचारी हर महीने 4200 रुपये वेतन ले रहे हैं। गांव में पेयजल संकट से हाहाकार मचा है, लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं, मगर सरकारी खजाने से ‘बिना काम का दाम’ लगातार दिया जा रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि नलकूप बंद होने से पूरे क्षेत्र में जलापूर्ति ठप है। गर्मी के दिनों में महिलाओं और बच्चों को दूर-दराज से पानी ढोना पड़ता है। इसके उलट, नलकूप पर तैनात बताए जा रहे कर्मचारियों को पिछले एक दशक से नियमित वेतन मिल रहा है। ग्रामीणों ने राज्यमंत्री से भेंटकर शिकायत दर्ज कराई है।
उनका आरोप है कि जल संस्थान के अधिकारियों की घोर लापरवाही या उच्च स्तर पर कथित साठगांठ के चलते यह खेल सालों से चल रहा है। ‘जब नलकूप से एक बूंद पानी नहीं निकल रहा तो वेतन किस बात का दिया जा रहा है? यह सीधे सरकारी धन की लूट है’, अनुमान है कि 10 साल में दोनों कर्मचारियों को ‘फ्री में’ करीब 10 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है। ग्रामीणों ने दोषी कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के साथ गांव में तत्काल पेयजल व्यवस्था बहाल करने की मांग की है।
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