
- विनोद मिश्रा
बांदा। जिल में ‘समाजवादी पार्टी का डाउन फाल तेजी’ से हो रहा हैं। पार्टी की सांसद कृष्णा पटेल की कैडर कार्यकर्ता एवं पार्टी की नीतियों के प्रति निष्क्रियता नें संगठन औऱ जनता के बीच दुराव की स्थिति उत्पन्न कर दी हैं ! यह स्थिति विधान सभा चुनाव में विस्फोटक साबित हो सकती है।
जिले चार विधान सभा सीटें है। बांदा, नरैनी, बबेरूऔर तिंदवारी। इसमें एक मात्र बबेरू विधान सभा सपा के पाले में है। यहां से विशंभर यादव तीसरी बार विधायक है औऱ वर्तमान में पार्टी की नीतियों की बुलंदी औऱ क्षेत्र में सभी जातियों में समुद्र सी राजनीतिक गहराई की सी पैठ रखते हैं। यह बात दीगर हैं की सांसद कृष्णा विधायक विशंभर की बढ़ती लोकप्रियता से बेचैन हैं?
इसके लिये वह हर ऐसा कूटनीतिक हथकंडा अपना रही हैं जो विधायक विशंभर औऱ पार्टी को नुकसान एवं भाजपा को कथित तौर फायदा पहुंचाए, लेकिन विशंभर के “राजनीतिक ब्रह्म दंड” के आगे उनके सारे प्रयास विफल हो रहे हैं। चर्चाओं की मानें तो नरैनी विधान सभा में सपा की हालत पिछली प्रत्याशी किरण वर्मा नें नाजुक कर दी हैं?
इस क्षेत्र से सांसद कृष्णा का ‘कटाव’ भी ‘कोढ़ में राजनीतिक खाज’ के नजरिये से देखा जा रहा है? कोई ऐसा सपा नेता नहीं दिखाई देता जो ‘चुनावी नैया पार’ कर दें। यहां तो जनता रालोद के प्रदेश महासचिव ‘वीरेंद्र साक्षी’ की ‘माला जपती’ हैं।
बांदा एवं तिंदवारी में भी सपा में पतझड़ हैं। एक दो लोगों को छोड़कर यहां टिकटार्थी भले ही अपने मुंह मिया मिट्ठू बनें लेकिन अधिकांश का कोई पुरसा हाल नहीं। इन दोनों सीटों पर भी सांसद कृष्णा पटेल की कथित राजनीतिक स्थिति औऱ भाजपा के प्रति पुराना उमड़ता प्यार जय श्रीराम बोल रहा हैं?
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