
- विनोद मिश्रा
बांदा। जहां खनन का नाम आते ही “धूल और बंजर” जमीन की तस्वीर उभरती है, वहीं दुरेंडी खदान से एक “नई हरित इबारत” लिखी जा रही है। रिद्धि सिद्धि हाउसिंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के संचालकों ने खदान क्षेत्र में वृहद वृक्षारोपण कर विकास और पर्यावरण के संतुलन की मिसाल पेश की है। कंपनी संचालकों ने सिर्फ औपचारिकता नहीं निभाई, बल्कि खुद फावड़ा उठाकर पौधे रोपे। खदान परिसर और आसपास की खाली जमीन पर नीम, पीपल, आम, जामुन और सहजन जैसे फलदार व छायादार पौधे लगाए गए।
संचालकों का कहना है कि खनन हमारी जरूरत है, पर पर्यावरण हमारी जिम्मेदारी है। इसीलिए हर साल खदान क्षेत्र का कुछ हिस्सा हरियाली को समर्पित किया जाएगा। वृक्षारोपण के इस पुनीत कार्य को देखकर ग्रामीण गदगद हो गए। ग्रामीणों ने कहा कि खदान संचालकों द्वारा किया गया यह कार्य अत्यंत सराहनीय है। अक्सर खनन से पर्यावरण को नुकसान की बात होती है, लेकिन यहां उल्टा पर्यावरण को संवारने का काम हो रहा है। यह पहल पूरे जिले के लिए “नजीर” है। ग्रामीणों ने भरोसा दिलाया कि “पौधों की देखभाल में वे भी कंपनी” का साथ देंगे।
इस अवसर पर महावीर सिंह राठौर, आर पी सिंह, संदीप सिंह, केशव पाल सहित दर्जनों ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने एक एक पौधे को गोद लेकर उसके संरक्षण का संकल्प लिया। विशेषज्ञ मानते हैं कि खनन क्षेत्रों में वृक्षारोपण से धूल नियंत्रण, भू जल स्तर सुधार और तापमान संतुलन में मदद मिलती है। रिद्धि सिद्धि हाउसिंग की यह पहल आने वाले समय में दुरेंडी खदान की तस्वीर बदल देगी। जहां कभी सिर्फ पत्थर थे, वहां अब छांव और ऑक्सीजन मिलेगी।
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