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August 26, 2026
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ब्लॉक प्रमुख व तहसीलदार समेत 'नौ' पर धोखाधड़ी का मुकदमा: जमीन घोटाले में बड़ा एक्शन !
उत्तर प्रदेश

ब्लॉक प्रमुख व तहसीलदार समेत ‘नौ’ पर धोखाधड़ी का मुकदमा: जमीन घोटाले में बड़ा एक्शन !

शरद मिश्रा सम्पादक सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • शरद मिश्रा

बांदा। जमीन के खेल ने ऐसा “विस्फोट” किया है कि “सियासी और प्रशासनिक गलियारों” में “हड़कंप” मच गया है। एक ही “जमीन को दोबारा बेचने” के “सनसनीखेज आरोपों” ने “पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली” पर “गंभीर सवाल” खड़े कर दिए हैं। न्यायालय के “सख्त आदेश” के बाद पुलिस ने तिंदवारी ब्लाक प्रमुख दीप शिखा सिंह, तत्कालीन सदर तहसीलदार राधेश्याम सिंह सहित कुल नौ लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर लिया है। इस कार्रवाई के बाद पूरे जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। हर जुबान पर एक ही सवाल है “आखिर जमीन का असली मालिक कौन” ?

खाकी का 'काला' सच: वर्दी हुई दागदार, इंस्पेक्टर समेत छह पुलिसकर्मियों पर कोर्ट की 'गाज'मामले की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है, जहां वर्षों पहले खरीदी गई जमीन अचानक कागजों में गायब हो जाती है और फिर उसी जमीन पर नए दावेदार सामने आ जाते हैं। तिंदवारी क्षेत्र के निवासी रामजीत सिंह ने आरोप लगाया कि उनके परिवार ने वर्ष 1981 में विधिवत बैनामा के जरिए जमीन खरीदी थी। तब से उस पर उनका कब्जा भी बना हुआ था, लेकिन चकबंदी प्रक्रिया के दौरान ऐसा खेल खेला गया कि जमीन फिर से पुराने विक्रेताओं के नाम चढ़ गई। बाद में उसे दूसरे लोगों के जरिए ब्लाक प्रमुख दीपशिखा सिंह को बेच दिया गया।

ब्लॉक प्रमुख व तहसीलदार समेत 'नौ' पर धोखाधड़ी का मुकदमा: जमीन घोटाले में बड़ा एक्शन ! सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि नामांतरण की प्रक्रिया के दौरान तत्कालीन तहसीलदार राधेश्याम सिंह ने बिना सभी पक्षों को सुने ही जमीन को नए खरीदार के नाम दर्ज करने का आदेश पारित कर दिया, जिससे पूरे मामले ने और तूल पकड़ लिया। पीड़ित का कहना है कि वह महीनों तक थाने से लेकर एसपी कार्यालय तक न्याय की गुहार लगाता रहा,लेकिन जब कहीं सुनवाई नहीं हुई तो उसे अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। आखिरकार कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद यह मामला दर्ज हो सका।

ब्लॉक प्रमुख व तहसीलदार समेत 'नौ' पर धोखाधड़ी का मुकदमा: जमीन घोटाले में बड़ा एक्शन ! इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या जमीन के रिकॉर्ड में इस तरह की हेराफेरी बिना किसी मिलीभगत के संभव है? यदि नहीं तो इसके पीछे कौन-कौन जिम्मेदार है ? यही वजह है कि यह मामला अब सिर्फ एक जमीन विवाद नहीं बल्कि सिस्टम की पारदर्शिता और विश्वसनीयता की “परीक्षा” बन गया है। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन इस ‘जमीन के खेल’ ने यह साफ कर दिया है कि अगर सच सामने आया तो कई बड़े चेहरे बेनकाब हो सकते हैं !

 

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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