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फर्जी रजिस्ट्री कांड: लेखपाल बना मास्टरमाइंड, नकली दस्तावेजों से हड़पी करोड़ो की जमीन !
उत्तर प्रदेश

फर्जी रजिस्ट्री कांड: लेखपाल बना मास्टरमाइंड, नकली दस्तावेजों से हड़पी करोड़ो की जमीन !

शरद मिश्रा सम्पादक सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • शरद मिश्रा

बांदा। जमीन की “रजिस्ट्री” के नाम पर चल रहा खेल अब “छिटपुट फर्जीवाड़ा” नहीं, बल्कि एक “संगठित और खतरनाक गिरोह” के रूप में सामने आया है। इस पूरे खेल का “सबसे चौंकाने” वाला पहलू यह है कि इसमें “सरकारी तंत्र का ही एक अहम चेहराचकबंदी लेखपाल “गिरोह की रीढ़” बनकर काम कर रहा था।

फर्जी रजिस्ट्री कांड: लेखपाल बना मास्टरमाइंड, नकली दस्तावेजों से हड़पी करोड़ो की जमीन !यह खुलासा सामने आते ही पूरे राजस्व विभाग और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवालों की बौछार शुरू हो गई है। क्या यह खेल अकेले एक लेखपाल कर रहा था? या फिर इसके पीछे पूरा सिस्टम शामिल है? आखिर इतने समय तक प्रशासन की नजर क्यों नहीं पड़ी? जांच में सामने आया कि चकबंदी लेखपाल विजय प्रकाश इस पूरे फर्जीवाड़े का मुख्य कड़ी था। वह राजस्व रिकॉर्ड से खाली और विवादित जमीनों की पहचान करता था। कमजोर, गरीब और अनजान जमीन मालिकों की जानकारी जुटाई जाती थी।

फर्जी रजिस्ट्री कांड: लेखपाल बना मास्टरमाइंड, नकली दस्तावेजों से हड़पी करोड़ो की जमीन !फिर ये गोपनीय सूचनाएं सीधे गिरोह तक पहुंचाई जाती थीं। यहीं से शुरू होता था जमीन हड़पने का पूरा ‘ब्लूप्रिंट’। गिरोह का तरीका बेहद शातिर और सुनियोजित था फर्जी विक्रेता खड़े किए जाते थे। नकली गवाह तैयार किए जाते थे। दस्तावेज ऐसे बनाए जाते थे कि असली और नकली में फर्क करना मुश्किल हो जाए। फिर रजिस्ट्री कराकर जमीन का सौदा पूरा और बाद में कब्जा भी! जांच में यह भी सामने आया है कि फर्जी आधार कार्ड और पहचान पत्र बड़े स्तर पर बनाए जाते थे। प्रिंटिंग और मोबाइल दुकानों का इस्तेमाल कर दस्तावेजों को असली जैसा बनाया जाता था।

फर्जी रजिस्ट्री कांड: लेखपाल बना मास्टरमाइंड, नकली दस्तावेजों से हड़पी करोड़ो की जमीन !यही वजह थी कि यह गिरोह लंबे समय तक बिना पकड़े सक्रिय रहा। गिरोह की नजर खासतौर पर उन लोगों पर रहती थी जो जमीन के कागजों की जानकारी नहीं रखते थे या आर्थिक रूप से इतने मजबूत नहीं थे कि कानूनी लड़ाई लड़ सकें। ऐसे लोगों की जमीनें चुपचाप ‘कागजों में’ बिक जाती थीं। मामले की गंभीरता अब और बढ़ गई है। शहर कोतवाली में पिछले कुछ महीनों में तीन ऐसे केस दर्ज हो चुके हैं। सभी में फर्जी रजिस्ट्री और जमीन हड़पने के आरोप हैं। आशंका है कि इस गिरोह के तार और भी बड़े नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। बांदा में जमीन माफिया का यह खेल अब बारूद बन चुका है बस चिंगारी की देर है, पूरा सिस्टम हिल सकता है।

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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