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गैस एजेंसियों द्वारा लूट: बिना सिलिंडर डिलीवरी, ब्लैक मार्केट में जल रही जनता की रसोई !
उत्तर प्रदेश

गैस एजेंसियों द्वारा ‘लूट’: बिना सिलिंडर डिलीवरी, ब्लैक मार्केट में ‘जल’ रही जनता की रसोई !

शरद मिश्रा सम्पादक सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • शरद मिश्रा

बांदा। गैस एजेंसियों का खेल अब “सिस्टम की गड़बड़ी” नहीं बल्कि एक “बड़े घोटाले” की “शक्ल” लेता जा रहा है। “ऑनलाइन बुकिंग” के नाम पर चल रहे इस “खेल” ने आम उपभोक्ताओं की “रसोई बुझा” दी है, जबकि सिलिंडर “ब्लैक मार्केट में धड़ल्ले” से बिक रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि उपभोक्ता अब खुलकर इसे “संगठित लूट” बता रहे हैं।

गैस सिलिंडर के लिए 'संग्राम': 'जनता' का फूटा गुस्सा, पुलिस ने 'हाथ जोड़कर' बचाई स्थितिसबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि उपभोक्ताओं को गैस नहीं मिल रही, लेकिन रिकॉर्ड में डिलीवरी दिखा दी जा रही है। चार-चार दिन तक बुकिंग नहीं होती,और अचानक ‘डिलीवर’ भी हो जाती है। उपभोक्ता खाली सिलिंडर लिए इंतजार करते रह जाते हैं, जबकि सिस्टम में सब कुछ ‘ठीक’ दिखाया जाता है।

गैस एजेंसियों द्वारा लूट: बिना सिलिंडर डिलीवरी, ब्लैक मार्केट में जल रही जनता की रसोई !मामला यहीं खत्म नहीं होता कई लोगों के नाम पर बिना बुकिंग के ही गैस सिलिंडर चढ़ा दिए गए। बिना डिलीवरी के ही सब्सिडी उनके खातों में पहुंच गई। आखिर जब सिलिंडर मिला ही नहीं, तो गया कहां ? सबसे बड़ा शक अब कालाबाजारी पर है। जब घरेलू उपभोक्ताओं को गैस नहीं मिल रही, तो वही सिलिंडर होटल और रेस्टोरेंट में कैसे पहुंच रहे हैं?

गैस एजेंसियों द्वारा लूट: बिना सिलिंडर डिलीवरी, ब्लैक मार्केट में जल रही जनता की रसोई !व्यावसायिक सिलिंडर की किल्लत के बीच चूल्हे कैसे जल रहे हैं ? साफ संकेत हैं कि घरेलू गैस को ब्लैक में बेचकर “मोटा मुनाफा” कमाया जा रहा है। यह कोई एक-दो दिन की गड़बड़ी नहीं है पूरा खेल “पिछले एक महीने से बेरोकटोक” चल रहा है। शिकायतें हुईं, लेकिन कार्रवाई सिर्फ दिखावे तक सीमित रही। दो दिन की ‘औपचारिक सख्ती’ के बाद सिस्टम फिर “ढर्रे” पर लौट आता है।

गैस एजेंसियों द्वारा लूट: बिना सिलिंडर डिलीवरी, ब्लैक मार्केट में जल रही जनता की रसोई !उपभोक्ताओं का गुस्सा खासतौर पर एक एजेंसी पर फूट रहा है। “आराधना इंडेन गैस एजेंसी” को लेकर सबसे ज्यादा शिकायतें हैं। आरोप है कि यहां यह खेल खुलेआम चल रहा है। इस पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका भी संदेह के घेरे में है ! जिला पूर्ति अधिकारी का फोन नहीं उठता। कार्यालय में मौजूदगी भी बेहद कम बताई जा रही है। क्या यह लापरवाही है या फिर मौन सहमति ? यह सिर्फ गैस की किल्लत नहीं, बल्कि सिस्टम की साख पर बड़ा सवाल है। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला बड़े घोटाले के रूप में फूट सकता है।

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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