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जीएसटी राहत की निकल गई हवा: महंगाई जस की तस, दुकानों पर पुराने रेट जारी, जनता में गुस्सा
उत्तर प्रदेश

जीएसटी राहत की निकल गई हवा: महंगाई जस की तस, दुकानों पर पुराने रेट जारी, जनता में गुस्सा

शरद मिश्रा सम्पादक सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • शरद मिश्रा

बांदा। केंद्र सरकार ने जनता को राहत देने की बड़ी घोषणा की थी जीएसटी दरों में कटौती, ताकि रोजमर्रा की ज़रूरतें सस्ती हों, आम आदमी की जेब पर बोझ कम हो। लेकिन बांदा की ज़मीन पर इस राहत की हवा निकल गई है। सात महीना बीत चुका है, पर शहर के बाजारों में न कोई रेट घटा, न जनता को कोई राहत मिली। अमूल दूध अब भी 70 लीटर, कपड़ा पुराने दाम पर, दवा-जनरल स्टोर-राशन सब जस के तस। सरकार के आदेश “काग़ज़ पर” हैं, और जनता के हिस्से आई है सिर्फ़ निराशा, नाराज़गी और सवालों की आंधी

जीएसटी लाभ बना मज़ाक: जनता बोली बांदा में सब ‘हवा-हवाई, प्रशासन पर उठे सवाल !

शहर के चौक, स्टेशन रोड, चौक बाजार, सिविल लाइन हर जगह एक ही चर्चा है “सरकार कहती है जीएसटी घटा, लेकिन दुकानदार अब भी पुराने दाम वसूल रहे हैं।” लोगों का कहना है कि सरकार ने राहत का ऐलान किया, लेकिन अमल कौन कराएगा ? न खाद्य विभाग हरकत में है, न प्रशासन को फिक्र। बाजारों में किसी दुकान पर नए रेट लिस्ट तक नहीं टंगे। जनता कह रही है अगर सरकार ने हमें राहत नहीं दिलाई, तो फिर जीएसटी दरों में कटौती का क्या मतलब ?

जीएसटी लाभ बना मज़ाक: जनता बोली बांदा में सब ‘हवा-हवाई, प्रशासन पर उठे सवाल !

जब अख़बार की टीम ने बाजारों का जायज़ा लिया, तो दुकानदारों ने कहा “हम क्या करें ? कंपनियों ने अभी तक हमें कम रेट पर माल नहीं भेजा।” लेकिन दूसरी ओर ग्राहक भड़क उठे। जब सरकार ने रेट घटाए हैं, तो दुकानदारों को भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। यह तो जनता के साथ धोखा है।

जीएसटी लाभ बना मज़ाक: जनता बोली बांदा में सब ‘हवा-हवाई, प्रशासन पर उठे सवाल !

खाद्य विभाग और जिला प्रशासन मूकदर्शक बने हुए हैं। न कोई अभियान चला, न किसी दुकान का निरीक्षण हुआ। एक महीने से अधिकारी सिर्फ़ फाइलें पलटते रह गए। व्यापार मंडल के पदाधिकारी भी खामोश हैं। किसी ने न बैठक की, न जनता को राहत दिलाने की पहल। परिणाम सरकार की छवि पर असर, जनता में रोष। आटोमोबाइल सेक्टर में कुछ कंपनियों ने जीएसटी दर घटाकर वाहन सस्ते किए हैं, जिससे ग्राहकों को थोड़ी राहत मिली है। लेकिन दूध, दवा, कपड़ा, जनरल स्टोर और किराना जहां रोज़ जनता खर्च करती है वहां कोई फर्क नहीं पड़ा। आम आदमी की जिंदगी में महंगाई का बोझ जस का तस बना हुआ है।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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