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कांग्रेस का केंद्र सरकार पर 'दोहरा' प्रहार: गांवों से छीना रोजगार, मताधिकार भी निशाने पर
उत्तर प्रदेश

कांग्रेस का केंद्र सरकार पर ‘दोहरा’ प्रहार: गांवों से छीना रोजगार, मताधिकार भी निशाने पर

शरद मिश्रा सम्पादक सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • शरद मिश्रा

बांदा। मनरेगा को बचाने की लड़ाई अब गांव-गांव तक पहुंचने लगी है। मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित ने बबेरू क्षेत्र में ग्रामीणों से सीधा संवाद कर केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार योजनाबद्ध तरीके से मनरेगा कानून को कमजोर कर रही है, जिससे ग्रामीण गरीबों, मजदूरों और बेरोजगारों का ‘हक’ छीना जा रहा है।

कांग्रेस का केंद्र सरकार पर 'दोहरा' प्रहार: गांवों से छीना रोजगार, मताधिकार भी निशाने पर

राजेश दीक्षित ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस शासनकाल में मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए जीवनरेखा थी। उस समय हर परिवार को 100 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी दी गई थी और समय पर मजदूरी न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान था। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने न सिर्फ इस गारंटी को कमजोर किया है, बल्कि मजदूरों के अधिकारों को भी धीरे-धीरे समाप्त कर दिया है। दीक्षित ने कहा कि पहले मनरेगा के तहत किस गांव में कौन सा काम होगा, इसका फैसला ग्रामसभा करती थी। इससे स्थानीय जरूरतों के अनुसार रोजगार मिलता था। लेकिन अब नई व्यवस्था में कामों का चयन दिल्ली से तय किया जाएगा, जिससे गांवों की स्वायत्तता खत्म हो जाएगी और रोजगार के अवसर सीमित होंगे।

कांग्रेस का केंद्र सरकार पर 'दोहरा' प्रहार: गांवों से छीना रोजगार, मताधिकार भी निशाने पर

उन्होंने इसे “मनरेगा की आत्मा पर हमला” करार दिया। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने ग्रामीणों से अपील की कि वे अपने हक की लड़ाई के लिए एकजुट हों और मनरेगा को कमजोर करने की किसी भी साजिश के खिलाफ आवाज उठाएं। इस दौरान राजेश दीक्षित ने चुनाव आयोग के एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) कार्यक्रम को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि आयोग द्वारा संशोधन की तारीख 6 मार्च 2026 तक बढ़ाए जाने के दौरान एसडीएम, ईआरओ और बीएलओ के समक्ष हजारों की संख्या में फॉर्म-6 और फॉर्म-7 जमा किए गए। इनमें से अधिकांश फॉर्म पूर्व-मुद्रित थे और आपत्तिकर्ताओं का विवरण अस्पष्ट पाया गया। उन्होंने इसे भारत निर्वाचन आयोग के नियमों का खुला उल्लंघन बताते हुए निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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