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October 13, 2026
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हनुमंत कथा में धीरेंद्र शास्त्री बोले: 'राम नाम' से ही कलियुग में उद्धार, विनम्रता से मिलेगी 'सिद्धि'
उत्तर प्रदेश

हनुमंत कथा में धीरेंद्र शास्त्री बोले: ‘राम नाम’ से ही कलियुग में उद्धार, विनम्रता से मिलेगी ‘सिद्धि’

शरद मिश्रा सम्पादक सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • शरद मिश्रा

बांदा। हनुमंत कथा के दूसरे दिन बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने धर्म, भक्ति और सनातन जीवन मूल्यों की सरल लेकिन प्रभावशाली व्याख्या की। कथा पंडाल में उमड़े हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि वही भक्ति सच्ची है जो सुख और दुख दोनों में समान रूप से साथ निभाए। केवल स्वार्थ के लिए की गई भक्ति को उन्होंने दिखावा बताया।

हनुमंत कथा में धीरेंद्र शास्त्री बोले: 'राम नाम' से ही कलियुग में उद्धार, विनम्रता से मिलेगी 'सिद्धि'

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भक्ति तभी पूर्ण होती है जब उसमें करुणा,समन्वय और सेवा का भाव जुड़ा हो। केवल पूजा-पाठ ही भक्ति नहीं, बल्कि मनुष्य के आचरण में करुणा और दूसरों के प्रति संवेदना का होना ही श्रेष्ठ भक्ति का स्वरूप है। हनुमान जी के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अहंकार मनुष्य को पतन की ओर ले जाता है, जबकि विनम्रता उसे ऊंचाइयों तक पहुंचाती है।

हनुमंत कथा में धीरेंद्र शास्त्री बोले: 'राम नाम' से ही कलियुग में उद्धार, विनम्रता से मिलेगी 'सिद्धि'

उन्होंने जीवन का गूढ़ सूत्र देते हुए कहा, “जब विपत्ति बड़ी हो जाए, तब स्वयं को छोटा कर लो और समय के साथ सफलता की प्रतीक्षा करो।” बागेश्वर सरकार ने कहा कि हनुमान जी केवल पराक्रम और बल के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे विद्या, विवेक और नीति में भी अद्वितीय थे। वे ज्ञान, सेवा और समर्पण का ऐसा आदर्श हैं,जो आज के युग में भी उतना ही प्रासंगिक है। कथा के दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने अपनी मधुर वाणी में बालाजी सहित अन्य भजन प्रस्तुत किए, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

हनुमंत कथा में धीरेंद्र शास्त्री बोले: 'राम नाम' से ही कलियुग में उद्धार, विनम्रता से मिलेगी 'सिद्धि'

उन्होंने कहा,“हनुमान जी को पाने के लिए कुछ छोड़ना नहीं पड़ता, बस उनका होना पड़ता है।” कहा कि कलियुग में राम का नाम ही भवसागर से पार लगाने वाला साधन है। सच्चे मन से लिया गया राम नाम जीवन के हर संकट को सरल बना देता है। उन्होंने बताया कि हनुमान जी के पास अष्ट सिद्धियां और नौ निधियां थीं, लेकिन उन्होंने कभी अभिमान नहीं किया और सदा विनम्र बने रहे।

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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