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बांदा की "खुशबू की कानपुर से लेकर दिल्ली तक बाहर" : "मोहब्बत" में हो रही "बोली की भरमार"
उत्तर प्रदेश

बांदा की “खुशबू की कानपुर से लेकर दिल्ली तक बाहर” : “मोहब्बत” में हो रही “बोली की भरमार”

  • विनोद मिश्रा

बांदा। जिले में गुमनामी की ओर जा रही खुशबू के दिन यौवना अवस्था की ओर लौटने लगे हैं। उसके चाहने वाले कद्रदान फिर बढ़ गये हैं। दना -दन बोली लगाई जा रही है। जी हाँ।

बांदा की "खुशबू की कानपुर से लेकर दिल्ली तक बाहर" : "मोहब्बत" में हो रही "बोली की भरमार"
Banda’s “Khushboo’s fragrance is out from Kanpur to Delhi”: There is a lot of dialect in “Mohabbat”

हम खबर बता रहें हैं बासमती और परसन चावल की। इसकी शानदार खुशबू कानपुर और दिल्ली के चावल कारोबारियों को खूब लुभा रही हैं। व्यापारी गांवों में यहां आकर खेतों में खड़ी इन फसलों की बोली लगा रहे हैं। अग्रिम धनराशि देकर धान बेचने का करार कर रहे हैं।

बांदा की "खुशबू की कानपुर से लेकर दिल्ली तक बाहर" : "मोहब्बत" में हो रही "बोली की भरमार"
Banda’s “Khushboo’s fragrance is out from Kanpur to Delhi”: There is a lot of dialect in “Mohabbat”

आपको बता दें की तीन दशक पहले तक सुगंधित धान बासमती, परसन, चिन्नावर की बड़े पैमाने पर खेती यहां खेती होती थी। यहां का चावल दूर-दूर तक भेजा जाता था, लेकिन नये बीजों की तुलना में कम उत्पादकता से धीरे-धीरे किसानों ने सुगंधित धान की रोपाई कम कर दी। दूसरा कारण यह भी रहा कि सरकारी क्रय केंद्र पर सुगंधित व पतले धान की खरीद भी मोटे धान के भाव ही होती है। ऐसे में किसान पूरी तरह से आढ़तियों पर निर्भर था। आढ़तिया मनमाने दाम पर धान खरीदते थे। इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा था।

बांदा की "खुशबू की कानपुर से लेकर दिल्ली तक बाहर" : "मोहब्बत" में हो रही "बोली की भरमार"
Banda’s “Khushboo’s fragrance is out from Kanpur to Delhi”: There is a lot of dialect in “Mohabbat”

पिछले वर्ष कीमत अच्छा प्राप्त होने से किसानों का रुझान बासमती और परसन की ओर लौटा। इस साल 61 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में धान की रोपाई की गई है। इसमें करीब आठ हजार हेक्टेयर में सुगंधित धान की रोपाई है। सबसे अधिक बांदा के नरैनी, अतर्रा आदि क्षेत्रों में छह हजार हेक्टेयर पतले धान की रोपाई है। इसकी जानकारी मिलते ही बाहरी चावल कारोबारी यहां आ जमे हैं। गांव-गांव जाकर फसलों की बोली लगा रहे हैं।

बांदा की "खुशबू की कानपुर से लेकर दिल्ली तक बाहर" : "मोहब्बत" में हो रही "बोली की भरमार"
Banda’s “Khushboo’s fragrance is out from Kanpur to Delhi”: There is a lot of dialect in “Mohabbat”

बिलगांव के किसान रामभवन का कहना है कि पांच बीघे में बासमती, परसन धान लगाया था। बाहरी व्यापारियों ने उनसे 3500 रुपये क्विंटल धान बेचने का करार किया है। 10 हजार रुपये एडवांस भी दे दिया है। बाजार लेकर जाते तो 2500 रुपये क्विंटल से अधिक दाम नहीं मिलते। खुरहंड के किसान रमेश ने बताया कि छह बीघे में सुगंधित बासमती, परसन लगाया है। बाहरी व्यापारी खड़ी फसल का 60 हजार रुपये दे गए हैं। यह धान मड़ाई के बाद उन्हें दिया जाएगा। धान की फसल तैयार होने में 15 दिन शेष हैं। अब नफा नुकसान की जिम्मेदारी क्रेता की है।

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

 
 



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