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बाट-माप शुल्क वृद्धि से 'भड़का' व्यापार जगत: सरकार के खिलाफ 'आर-पार' की दी 'चेतावनी'
उत्तर प्रदेश

बाट-माप शुल्क वृद्धि से ‘भड़का’ व्यापार जगत: सरकार के खिलाफ ‘आर-पार’ की दी ‘चेतावनी’

शरद मिश्रा सम्पादक सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • शरद मिश्रा

बांदा। सरकारी नीतियों से पिसता व्यापारी समाज अब निर्णायक मोड़ पर खड़ा नजर आ रहा है। बाट-माप उपकरणों के सत्यापन शुल्क में की गई अचानक, अव्यवहारिक और कई गुना बढ़ोतरी ने व्यापारियों के ‘सब्र का बांध’ तोड़ दिया है। राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन के बैनर तले व्यापारियों ने जोरदार विरोध दर्ज कराते हुए साफ कर दिया कि अब अनदेखी, उत्पीड़न और तानाशाही फैसले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।

बाट-माप शुल्क वृद्धि से 'भड़का' व्यापार जगत: सरकार के खिलाफ 'आर-पार' की दी 'चेतावनी'

संगठन ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि जल्द निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो व्यापारी समाज ‘एक निशान-एक विधान’ के संकल्प के साथ अपना राजनीतिक विकल्प तय करेगा। यह पूरा विवाद भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा 23 अक्टूबर 2025 को जारी अधिसूचना से जुड़ा है। इस आदेश के तहत जल मीटर, गैस मीटर, थर्मामीटर, स्फिग्मोमैनोमीटर, काउंटर मशीन, बाट और तौल यंत्र सहित 18 प्रकार के उपकरणों के वार्षिक सत्यापन शुल्क में बेतहाशा बढ़ोतरी कर दी गई है।

बाट-माप शुल्क वृद्धि से 'भड़का' व्यापार जगत: सरकार के खिलाफ 'आर-पार' की दी 'चेतावनी'

राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन के पदाधिकारी अमित गुप्ता ने बताया कि 10 किलो तक के तराजू का शुल्क 220 से सीधे 2000 रुपए। 10 किलो से अधिक के तराजू पर 3000 रुपए शुल्क और बाट, काउंटर मशीन और अन्य उपकरणों के शुल्क में भी कई गुना इजाफा हुआ है। उन्होंने कहा कि यह फैसला छोटे व्यापारियों, फुटकर दुकानदारों और एमएसएमई सेक्टर की ‘कमर तोड़ने’ वाला है।

बाट-माप शुल्क वृद्धि से 'भड़का' व्यापार जगत: सरकार के खिलाफ 'आर-पार' की दी 'चेतावनी'

अमित गुप्ता ने बबेरू में चौराहों के चौड़ीकरण के नाम पर व्यापारियों को उजाड़े जाने की कार्रवाई पर तीखा हमला बोलते हुए कहा “अगर विकास का मतलब दुकानें तोड़ना और रोजगार छीनना है, तो ऐसा विकास स्वीकार नहीं।” संगठन ने ई-कॉमर्स कंपनियों को मिल रही छूट और छोटे व्यापारियों पर नियमों के बोझ को दोहरा मापदंड करार दिया। व्यापारियों का कहना है कि एक ओर ऑनलाइन कंपनियों को खुली छूट है, दूसरी ओर स्थानीय दुकानदारों को शुल्क और नियमों में जकड़ा जा रहा है। व्यापारियों ने दो टूक कहा अब फैसले व्यापारियों की सहमति के बिना नहीं चलेंगे। अगर सरकार नहीं सुनेगी, तो व्यापारी सड़क से सदन तक जवाब देगा ।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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