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भदावल बालू खदान में 'अवैध खनन' का खुला साम्राज्य: कानून घुटनों पर, प्रशासन 'मौन' ?
उत्तर प्रदेश

भदावल बालू खदान में ‘अवैध खनन’ का खुला साम्राज्य: कानून घुटनों पर, प्रशासन ‘मौन’ ?

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। यह कोई सामान्य खबर नहीं यह ‘बालू माफिया’ द्वारा अवैध खनन का निरंतर हो रहा सबसे बड़ा खुलासा है। दिसंबर की शुरुआत में जिले में दर्जनभर से अधिक खदानों के ‘सक्रिय’ हैं। लेकिन असली कहानी बदौसा की भदावल बालू खदान से निकलकर सामने आई एक ऐसी कहानी, जिसे “दबाने में पूरा सिस्टम” लगा हुआ है?

भदावल बालू खदान में 'अवैध खनन' का खुला साम्राज्य: कानून घुटनों पर, प्रशासन 'मौन' ?

इस खदान का संचालन करने वाली त्रिपाठी कंस्ट्रक्शन कंपनी का बेलगाम खनन अब “प्रशासन की साख पर सीधा हमला” है ! यहां पट्टा एक जगह का है, माइनिंग दो जगह चल रही है, प्रशासन चुप्पी साधे बैठा है। अगर इसे माफिया राज नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे ?

भदावल बालू खदान में 'अवैध खनन' का खुला साम्राज्य: कानून घुटनों पर, प्रशासन 'मौन' ?

बांदा की बागेन नदी के गाटा नंबर- 1169, 1858/3, 1133/4, 1161/3, 1949 में खनन की वैध अनुमति है। लेकिन शिवचंद्र त्रिपाठी की टीम ने इन सीमाओं को रौंदते हुए सीमा पार, चित्रकूट जिले के पहड़िया बुजुर्ग सानी में गाटा संख्या 1133/1, 1133/2, 1133/3 को भी खोद डाला। यह अवैध खनन नहीं यह खुलेआम ‘दबंगई’ है?

भदावल बालू खदान में 'अवैध खनन' का खुला साम्राज्य: कानून घुटनों पर, प्रशासन 'मौन' ?

बागेन नदी की धारा बदली जा रही है। पंप कैनाल का कटाव तेज हो गया है। भारी मशीनें गैर कानूनी ढंग से चौबीस घंटे गरज रही हैं ? कानूनी सीमा, नियम सब कुछ ध्वस्त ! खदान में गोला-बारूद से लैस गुंडे मौजूद हैं। उनका काम विरोधियों को डराना, वीडियो न बनने देना हैं। पूरे इलाके में भय का साम्राज्य है। लोग बोलना चाहते हैं, लेकिन बोल नहीं पा रहे। क्या यह प्रशासन की नाकामी नहीं ? या फिर प्रशासन जानबूझकर आंखें मूंदे है ? स्थानीय लोगों ने शिकायतें लिखीं। सबूत दिए। जायजा लेने की मांग उठाई।

भदावल बालू खदान में 'अवैध खनन' का खुला साम्राज्य: कानून घुटनों पर, प्रशासन 'मौन' ?

लेकिन हर शिकायत का अंत एक ही वाक्य पर “कार्यवाही की जाएगी।” और होता कुछ नहीं ? ऐसा क्यों?  त्रिपाठी कंस्ट्रक्शन की ‘पहुंच’ कहाँ तक है ? कौन-कौन इसमें शामिल है ? जब खनन सीमा पार होकर दूसरे जिले तक पहुंच जाए जब नदी की धारा बदल जाए जब मशीनें दिन-रात “कदमताल” करती रहें जब असलहे तने हों जब शिकायतें ऊपरी दफ्तर में “दम तोड़” दें तो फिर सवाल उठना लाज़मी है “क्या खनन माफिया ने पूरे सिस्टम को खरीद लिया है” ?

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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