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बिजली का 'काला' सच: कागज़ों में करोड़ों, धरातल पर अंधेरा, दो नये 'फीडर' भी बेअसर
उत्तर प्रदेश

बिजली का ‘काला’ सच: कागज़ों में करोड़ों, धरातल पर अंधेरा, दो नये ‘फीडर’ भी बेअसर

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। जिले की बिजली व्यवस्था सिर्फ ‘कमजोर’ नहीं है यह एक संगठित ‘प्रशासनिक विफलता का नमूना’ बन चुकी है। बिजली विभाग की फाइलें चमक रही हैं, अफसरों के बयानों में व्यवस्था “सुधर” रही है, करोड़ों रुपये जर्जर तार बदलने में “खर्च” कर दिये गये पर सच्चाई ? बांदा शहर में ‘बिजली आपूर्ति लाईलाज बीमारी’ बन चुकी है।

बिजली का 'काला' सच: कागज़ों में करोड़ों, धरातल पर अंधेरा, दो नये 'फीडर' भी बेअसर

नए बने दो बिजली उपकेंद्र भी शहर की अंधेरी किस्मत नहीं बदल पा रहे। हाल यह कि आठ-आठ घंटे तक बत्ती गुल और विभाग के पास हर बार एक नई कहानी ! सुबह 10 बजे ही बांबेश्वर फीडर का सेटडाउन ले लिया गया। कारण बताया गया जरैली कोठी तिराहे के पास 11 केवी सेक्शन खोलना है। स्टेडियम के पास लाइन शिफ्टिंग का कार्य होगा।

बिजली का 'काला' सच: कागज़ों में करोड़ों, धरातल पर अंधेरा, दो नये 'फीडर' भी बेअसर

वादा किया गया था कि शाम 5 बजे तक आपूर्ति नार्मल हो जाएगी, लेकिन शाम 6 बजे तक दर्जनों मोहल्लों में बिजली आपूर्ति चालू नहीं हो सकी थी। सुबह जब लोग पानी भरने में लगे थे, तभी छोटी बाजार फीडर ठप्प ! यह तो मात्र कुछ फीडरों का उदाहरण है। सच्चाई यह है कि जिला मुख्यालय की बिजली आपूर्ति का हाल “माशाअल्ला-सा बेहाल” है।

बिजली का 'काला' सच: कागज़ों में करोड़ों, धरातल पर अंधेरा, दो नये 'फीडर' भी बेअसर

सदर विधायक प्रकाश दिवेदी के प्रयास से संकट मोचन के सामने मैदान और नवाब टैंक के पास दो नए फीडर बन चुके हैं। बिजली विभाग का ‘दावा’ था कि शहर के लोड को बांटा जाएगा, ओवरलोडिंग खत्म होगी, और कटौती में कमी आएगी। लेकिन वास्तविकता उलटी खड़ी है फीडर बढ़े, खर्च बढ़ा,काम बढ़ा पर बिजली की विश्वसनीयता वहीं की वहीं ! लाइनें बदली गईं ये दावा है। करोड़ों रुपये लगाए गए ये फाइल कहती है।

बिजली का 'काला' सच: कागज़ों में करोड़ों, धरातल पर अंधेरा, दो नये 'फीडर' भी बेअसर

पर सवाल जनता पूछ रही है अगर लाइनें नई हैं, तो बार-बार ट्रिपिंग क्यों ? अगर फीडर ज्यादा हैं, तो अंधेरा स्थायी क्यों ? अगर सिस्टम सुधरा है, तो कटौती इतनी लाइलाज क्यों ? अब यक्ष प्रश्न शहर के गली-कूचों में गूंज रहा है। कौन देगा जवाब? कौन लेगा जिम्मेदारी? कौन बताएगा कि जनता का पैसा कहाँ बहा? बांदा की जनता ठगी गई है या बिजली व्यवस्था सचमुच बीमार है यह जांच और जवाबदेही की मांग करता है। अंधेरा अब सिर्फ बिजली का नहीं, बल्कि व्यवस्था की ‘नाकामी का प्रतीक’ बन चुका है।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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