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October 12, 2026
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कोचिंग 'माफिया' सक्रिय: मंडल में चल रहीं 'अवैध' सैकड़ों कोचिंगें, शिक्षा विभाग बना 'मूकदर्शक' !
उत्तर प्रदेश

कोचिंग ‘माफिया’ सक्रिय: मंडल में चल रहीं ‘अवैध’ सैकड़ों कोचिंगें, शिक्षा विभाग बना ‘मूकदर्शक’ !

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। शिक्षा अब तपस्या नहीं, कारोबार बन गई है यह सच बांदा मंडल के कोचिंग संस्थानों पर पूरी तरह लागू होता है। जिले से लेकर मंडल के चारों जिलों तक कोचिंग संस्थानों की भरमार है, पर गुणवत्ता और मानक का कहीं नामोनिशान नहीं। न सुरक्षा, न पारदर्शिता, न पढ़ाई का माहौल बस फीस की मोटी वसूली और भीड़भाड़ वाले टीनशेड या कबूतरखाने जैसे कमरों में ठूंस-ठूंसकर बच्चों को बिठाया जा रहा है।

कोचिंग 'माफिया' सक्रिय: मंडल में चल रहीं 'अवैध' सैकड़ों कोचिंगें, शिक्षा विभाग बना 'मूकदर्शक' !

सत्र शुरू हुए छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन न किसी विभाग ने जांच की जहमत उठाई, न ही किसी जिम्मेदार ने मानक परखा। यह हाल तब है जब शासन ने कोचिंग संस्थानों के लिए बाकायदा गाइडलाइन जारी कर रखी है। कोचिंग संस्थानों में छात्रों के लिए न तो पर्याप्त जगह है, न ही सुरक्षा इंतज़ाम। कई जगह टीन डालकर क्लास चलाई जा रही है, तो कहीं पर बिना रोशनी और वेंटिलेशन वाले कमरों में छात्रों को ठूंसा जा रहा है। 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के प्रवेश पर रोक है, लेकिन इसका भी खुला उल्लंघन हो रहा है। आग से बचाव, आकस्मिक निकासी मार्ग, अलग एंट्री-एग्जिट की व्यवस्था, योग्य शिक्षक सब कुछ सिर्फ कागज़ पर है। डीआइओएस और शिक्षा विभाग की आंखों के सामने शिक्षा का यह खेल चल रहा है।

कोचिंग 'माफिया' सक्रिय: मंडल में चल रहीं 'अवैध' सैकड़ों कोचिंगें, शिक्षा विभाग बना 'मूकदर्शक' !

कोचिंग संस्थानों ने फीस का कोई तय मानक नहीं रखा है। एक विषय के 800 से 1,000 तक वसूले जा रहे हैं। भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान और अंग्रेजी जैसे चार विषयों की तैयारी कराने में एक छात्र को 3,000 प्रति माह तक खर्च करने पड़ रहे हैं। एक संस्थान में 100 छात्रों का पंजीकरण दिखाया गया है, पर असल में 1,000 से अधिक बच्चों को दिनभर अलग-अलग बैच में पढ़ाया जा रहा है। यह सब बिना सीसीटीवी निगरानी और पारदर्शिता के हो रहा है।

कोचिंग 'माफिया' सक्रिय: मंडल में चल रहीं 'अवैध' सैकड़ों कोचिंगें, शिक्षा विभाग बना 'मूकदर्शक' !

मंडल में कुल 211 पंजीकृत कोचिंग संस्थान हैं। बांदा में 67, चित्रकूट में 46, हमीरपुर में 55 और महोबा में 43। लेकिन इनसे चार गुना अधिक अपंजीकृत संस्थान खुलेआम संचालित हो रहे हैं। इन पर न किसी विभाग का नियंत्रण है और न कोई जवाबदेही। शिक्षा के इस “अघोषित उद्योग” में न सुरक्षा का मानक है और न ही जवाबदेही। मालिकों के पास हैसियत, सिफारिश और प्रभाव का कवच है इसी कारण कार्रवाई की फाइलें विभागीय दफ्तरों में धूल फांक रही हैं। संयुक्त शिक्षा निदेशक माध्यमिक शिक्षा राजू राणा का कहना है कि सभी जिलों को निर्देश जारी किए गए हैं कि कोचिंग संस्थानों के पंजीकरण और मानकों की जांच की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि मानक तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी, लेकिन अब तक ऐसी कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।

 

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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