- विनोद मिश्रा
बांदा । केंचुआ से मित्रता बढ़ाये और मालामाल हो जाये। वह कैसे पूरी खबर को पढ़कर समझें। दरसल बुंदेलखंड में मूंगफली उत्पादन बढ़ाने के लिए कृषि विश्वविद्यालय द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के मूंगफली अनुसंधान निदेशालय द्वारा वित पोषित परियोजना मूंगफली की तकनीकी आधारित जानकारी दी गई।

कुलपति ने किसानों को केंचुआ खाद अपनाकर जैविक खेती करने पर जोर दिया। दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन पर डॉ. धर्मेन्द्र कुमार, डॉ. अरुण कुमार, डॉ. वीके सिंह ने कुलपति का अभिनंदन किया। कार्यक्रम में जिले के 52 लाभार्थी किसानों ने प्रतिभाग किया। कुलपति डॉ. यूएस गौतम ने किसानों को प्राकृतिक व जैविक खेती के महत्व के साथ ही मूंगफली की खेती में केंचुआ खाद के महत्व को विस्तार से बताया।

कुलपति ने लाभार्थी किसानों को प्रशिक्षण के प्रमाण पत्र के साथ ही वर्मी बेड, केंचुआ खाद बनाने के लिये केंचुए भी वितरित किये। दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन पर बीते दिवस वर्मी बेड के प्रयोग, केंचुआ खाद उत्पादन की विधि, तकनीक एवं प्रयोग पर डॉ. देव कुमार, डॉ. अरविद कुमार गुप्ता ने प्रशिक्षण दिया।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )





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