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डीएम के आदेश 'हवा-हवाई': गांवों में बीमारी का आतंक, अफसरों ने उड़ाई 'भ्रष्टाचार की पतंग' !
उत्तर प्रदेश

डीएम के आदेश ‘हवा-हवाई’: गांवों में बीमारी का आतंक, अफसरों ने उड़ाई ‘भ्रष्टाचार की पतंग’ !

विनोद कुमार मिश्रा ( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )

  • विनोद मिश्रा

बांदा। बरसात का ‘मौसम और बीमारियों’ का खतरा लेकिन ‘प्रशासनिक मशीनरी’ की ‘लापरवाही ने हालात और खतरनाक’ बना दिए हैं। डीएम जे. रीभा ने गांवों में एंटी-लार्वा छिड़काव और फॉगिंग कराने के आदेश दिए थे। मंशा थी कि डेंगू, मलेरिया और वायरल बुखार जैसी बीमारियों से ग्रामीणों को बचाया जाए। लेकिन इन आदेशों का हाल वही हुआ जो अक्सर होता है कागज़ी खानापूर्ति और भ्रष्टाचार का खेल।

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डीएम ने जिला पंचायत राज अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी थी। एडीओ पंचायत, सचिव और प्रधानों की मौजूदगी में फॉगिंग और छिड़काव की कवायद की बात कही गई। खराब फॉगिंग मशीनों को शीघ्र ठीक करने का अल्टीमेटम दिया गया। लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट कुछ और कह रही है। गांवों में फॉगिंग का धुआं तो नहीं दिखा,पर अफसरों के खोखले दावे ज़रूर तैर रहे हैं। जिला पंचायत राज अधिकारी की टीम ने चहितारा और मवई बुज़ुर्ग में दिखावे की फॉगिंग की।

डीएम के आदेश 'हवा-हवाई': गांवों में बीमारी का आतंक, अफसरों ने उड़ाई 'भ्रष्टाचार की पतंग' !

जसपुरा ब्लॉक के नर्जिता, नांदादेव, नरौली और डंडामऊ में भी अभियान का प्रचार ज़ोरों से हुआ, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यह सब सिर्फ़ फोटो खिंचवाने और फाइलें पूरी करने के लिए था। गांवों में डेंगू और मलेरिया का कहर बढ़ रहा है। स्कूलों के बच्चे बीमार हो रहे हैं। अस्पतालों तक मरीजों की लाइनें लग रही हैं। मगर प्रशासन की फॉगिंग मशीनें या तो खराब हैं या फिर बंद पड़ी धूल खा रही हैं।

डीएम के आदेश 'हवा-हवाई': गांवों में बीमारी का आतंक, अफसरों ने उड़ाई 'भ्रष्टाचार की पतंग' !

लोगों का आरोप है कि एंटी-लार्वा दवा और फॉगिंग के नाम पर सिर्फ़ ‘फंड हजम’ किया जा रहा है ! ग्रामीणों की मांग है कि इस पूरे अभियान की जांच उच्चस्तर पर कराई जाए। पता लगाया जाए कि कितनी दवा खरीदी गई, कितनी मशीनें चलाई गईं और वास्तव में कितने गांवों में काम हुआ। अगर अभियान सही ढंग से चला, तो गांवों में बीमारी क्यों फैल रही है ? दवा और मशीन का हिसाब कहां है ? अफसर और प्रधान-सचिव की मिलीभगत पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही ? फिलहाल हालात यह हैं कि गांव बीमारियों की गिरफ्त में हैं, लोग डरे-सहमे हैं और अफसर भ्रष्टाचार की ढाल में सुरक्षित बैठे हैं। डीएम का आदेश मज़ाक बन गया है और स्वास्थ्य सेवाएं रसातल में जा चुकी हैं।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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