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पंचायत अध्यक्ष सुनील पर फिर फूटा 'भ्रष्टाचार' का बम: टेंडर 'घोटाले' का नया खेल 'उजागर'
उत्तर प्रदेश

पंचायत अध्यक्ष सुनील पर फिर फूटा ‘भ्रष्टाचार’ का बम: टेंडर ‘घोटाले’ का नया खेल ‘उजागर’

विनोद कुमार मिश्रा ( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )

  • विनोद मिश्रा

बांदा। जिला पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर ‘भ्रष्टाचार की ऐसी बदबू’ फैल रही है कि जिले की ‘जनता का गला घुटने’ लगा है। जिले की राजनीति और पंचायत तंत्र एक बार फिर भ्रष्टाचार की आग में झुलसता नजर आ रहा है।

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जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील पटेल पर पहले से ही भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लंबित थे और शासन स्तर पर जांच की फाइल धूल खा रही थी। लेकिन सोमवार को एक बार फिर ठेकेदारों ने हल्ला बोलकर सुनील पटेल पर नए आरोप जड़ दिए। इस बार मामला टेंडरों में धांधली और कमीशनखोरी का है।

पंचायत अध्यक्ष सुनील पर फिर फूटा 'भ्रष्टाचार' का बम: टेंडर 'घोटाले' का नया खेल 'उजागर'

जिला पंचायत कार्यालय में सोमवार को कई ठेकेदारों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया। आरोप लगाया कि सुनील पटेल अपने चहेते ठेकेदारों को ही टेंडर में शामिल करते हैं और इसके एवज में मोटी कमीशन वसूलते हैं। जो ठेकेदार कमीशन देने से इनकार करते हैं, उन्हें टोकन ही नहीं दिया जाता। बिना टोकन के टेंडर फॉर्म रद्द हो जाता है।

पंचायत अध्यक्ष सुनील पर फिर फूटा 'भ्रष्टाचार' का बम: टेंडर 'घोटाले' का नया खेल 'उजागर'

हैरानी की बात यह है कि सरकार ने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए ई-टेंडरिंग प्रणाली अनिवार्य कर रखी है, फिर भी बांदा की जिला पंचायत में “टोकन पर्ची” का नियम थोपकर ठेकेदारों से वसूली का नया रास्ता निकाल लिया गया है।

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सोमवार के इस हंगामे में ठेकेदार जब कार्यालय पहुंचे तो जिला पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी मौके से गायब मिले। बीमारी का बहाना बनाकर अफसरों ने कार्यालय से दूरी बना ली। वहीं, अध्यक्ष सुनील पटेल भी अचानक नदारद हो गए। गौरतलब है कि इससे पहले भी जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील पटेल पर भ्रष्टाचार की जांच हो चुकी है, जिसमें वह दोषी पाए गए थे।

पंचायत अध्यक्ष सुनील पर फिर फूटा 'भ्रष्टाचार' का बम: टेंडर 'घोटाले' का नया खेल 'उजागर'

कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी गई लेकिन अभी तक उस पर कोई निर्णय नहीं हुआ। ऐसे में अब नए आरोपों ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। ठेकेदारों का कहना है कि जिला पंचायत अध्यक्ष और उनके चहेते अधिकारी मिलकर भ्रष्टाचार की नई पटकथा लिख रहे हैं। विकास कार्यों के नाम पर लूट का खेल चल रहा है। “जब तक विभाग से पर्ची नहीं ली जाती, तब तक ई-टेंडर का भरा गया फॉर्म अवैध माना जाता है।” यह कथित नियम ही सवाल खड़े करता है।

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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