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लिख लोढ़ा पढ़ पत्थर बनी बेसिक शिक्षा: डीएम के निरीक्षण में 'उजागर' हुई बदहाल व्यवस्था
उत्तर प्रदेश

लिख लोढ़ा पढ़ पत्थर बनी बेसिक शिक्षा: डीएम के निरीक्षण में ‘उजागर’ हुई बदहाल व्यवस्था

विनोद कुमार मिश्रा ( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )

  • विनोद मिश्रा

बांदा। जिले की बेसिक शिक्षा व्यवस्था का हाल देखकर हर कोई ‘हैरान’ है। सरकारी विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का स्तर “लिख लोढ़ा पढ़ पत्थर” वाली कहावत को चरितार्थ कर रहा है। मंगलवार को डीएम जे. रीभा ने बड़ोखर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय बोधीपुरवा और परमपुरवा का औचक निरीक्षण किया तो पूरा सच सामने आ गया। न बच्चों की पढ़ाई में रुचि, न शिक्षकों का उत्तरदायित्व, न ही विद्यालय में मूलभूत सुविधाएं सब कुछ बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा था।

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निरीक्षण के दौरान डीएम ने जब खुद कक्षा-3 के बच्चों से जोड़-घटाव और सामान्य प्रश्न पूछे तो वे मौन हो गए। न किताबों की समझ, न सवाल का हल। स्थिति साफ थी कि पढ़ाई नाम मात्र की हो रही है। डीएम ने खुद ब्लैकबोर्ड पर पढ़ाना शुरू किया और उसी समय यह महसूस कर लिया कि बच्चों की शिक्षा का स्तर बेहद चिंताजनक है।

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निरीक्षण में मिड-डे मील की स्थिति भी संतोषजनक नहीं मिली। मीनू के अनुसार भोजन नहीं बन रहा था और गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो गए। विद्यालयों में साफ-सफाई ध्वस्त मिली। बच्चों को न तो शुद्ध पेयजल उपलब्ध था और न ही हैंडवॉश की सुविधा। शौचालय जर्जर हालत में थे और अधिकतर अनुपयोगी।

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डीएम ने देखा कि अधिकांश बच्चे ड्रेस में नहीं थे। उपस्थिति पंजिका देखकर भी यह साफ हो गया कि पंजीकृत छात्र विद्यालय में मौजूद नहीं थे। कई बच्चे अनुपस्थित थे और उपस्थिति का आंकड़ा सिर्फ कागजों पर चमक रहा था। बदहाल शिक्षा व्यवस्था देखकर डीएम रीभा का गुस्सा फूट पड़ा।

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उन्होंने मौके पर मौजूद शिक्षकों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को खरी-खोटी सुनाई। आदेश दिए कि सभी बच्चे ड्रेस पहनकर विद्यालय आएं। शुद्ध पेयजल एवं हैंडवॉश हेतु नल अवश्य लगाए जाएं। शौचालय तत्काल ठीक कराए जाएं। मिड-डे मील गुणवत्ता युक्त और मीनू के अनुसार हो। बच्चों की उपस्थिति पंजी के अनुसार हर हाल में सुनिश्चित की जाए और शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने के लिए शिक्षक व्यक्तिगत जिम्मेदारी लें।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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