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मेडिकल कॉलेज दम तोड़ रहा, स्वास्थ्य मंत्रालय फाइलों में सो रहा: व्यवस्था आईसीयू में
उत्तर प्रदेश

मेडिकल कॉलेज दम तोड़ रहा, स्वास्थ्य मंत्रालय फाइलों में सो रहा: व्यवस्था आईसीयू में

विनोद कुमार मिश्रा ( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )

  • विनोद मिश्रा

बांदा। चित्रकूट मंडल की चिकित्सा उम्मीदों को पंख देने के लिए बना रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज स्वास्थ्य मंत्रालय की घोर उपेक्षा का शिकार बनता जा रहा है। चिकित्सा के इस प्रमुख केंद्र की हालत इस कदर बदहाल हो चुकी है कि यहां की स्वास्थ्य सेवाएं हिचकोले खा रही हैं। एक साल से तीन अधिक बीत गए, लेकिन 39 नर्सिंग स्टाफ की आउटसोर्सिंग से नियुक्ति का प्रस्ताव स्वास्थ्य मंत्रालय की फाइलों में धूल फांक रहा है।

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इस गंभीर स्थिति से मेडिकल कॉलेज प्रशासन परेशान और बेबस है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि प्राचार्य सुनील कौशल खुद कबूलते हैं कि “हमने प्रस्ताव भेजा था, लेकिन अभी तक कोई मंजूरी नहीं” मिली। अब प्रतीक्षा असहनीय होती जा रही है।”

मेडिकल कालेज स्टाफ नर्सों की कमी से बेहाल : स्वास्थ मंत्री नहीं दे रहे हैं ध्यान !

स्वास्थ्य सेवाओं में सबसे बड़ी रीढ़ होती है नर्सिंग व्यवस्था, लेकिन रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में यह पूरी तरह चरमरा चुकी है। कुछ नर्सें संविदा अवधि पूरी होने के कारण हट चुकी हैं, जिससे स्थिति और भी चिंताजनक हो गई है। ओपीडी से लेकर भर्ती वार्डों तक, मरीजों की देखरेख संकट में फंसी है।

मेडिकल कालेज स्टाफ नर्सों की कमी से बेहाल : स्वास्थ मंत्री नहीं दे रहे हैं ध्यान !

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं सभी विभागों से रिक्त पदों की सूची मांगकर तेजी से नियुक्तियों की प्रक्रिया चला रहे हैं। लेकिन हैरानी की बात है कि उन्हीं के नेतृत्व वाली सरकार का स्वास्थ्य मंत्रालय पूरी तरह सुस्त और उपेक्षा पूर्ण रवैया अपना रहा है। यह वही मेडिकल कॉलेज है जिसे लेकर बुंदेलखंड के लोगों को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन फाइलों में लटकी स्वीकृतियों ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

मेडिकल कालेज स्टाफ नर्सों की कमी से बेहाल : स्वास्थ मंत्री नहीं दे रहे हैं ध्यान !

बांदा का यह मेडिकल कॉलेज नर्सिंग स्टाफ और चिकित्सकों की भारी कमी से जूझ रहा है। चिकित्सा विभाग के कई महत्वपूर्ण विभागों में डॉक्टरों की भी कमी है। लेकिन मंत्रालय की तरफ से न तो कोई संज्ञान लिया गया और न ही कोई कार्रवाई। स्वास्थ्य मंत्रालय की यह चुप्पी जनता की तकलीफों पर ताला लगाने जैसा है। मंडल मुख्यालय का यह मेडिकल कॉलेज उपेक्षा और अफसरशाही का कब्रगाह बनता जा रहा है।

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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