

- विनोद मिश्रा
चित्रकूट। चित्रकूट में दीपोत्सव का इतिहास अयोध्या से भी पुराना है। यहां लगभग तीस लाख दीपक जलेंगें। अयोध्या में सरकारी आयोजन में 25 लाख दीप जलना है।

चित्रकूट में अयोध्या की तरह दीपावली का त्योहार खास तरीके से मनाया जाता है। यहां हर साल धनतेरस से भाई दूज तक पांच दिन का उत्सव होता है। इसमें शामिल होने के लिए देश के कोने-कोने से आने वाले लाखों की संख्या में श्रद्धालु मंदाकिनी नदी में दीपदान कर समृद्धि की कामना करते हैं।

मान्यता है कि वनवास काल में साढ़े 11 साल चित्रकूट में गुजारने वाले प्रभु श्रीराम अब भी यहां के कण-कण में हैं। लंका विजय के बाद भगवान राम ने ऋषि-मुनियों के साथ मंदाकिनी नदी में दीपदान कर सबका आभार जताया था, फिर अयोध्या गए थे। चित्रकूट राष्ट्रीय रामायण मेला के कार्यकारी अध्यक्ष प्रशांत करवरिया का कहना है की यहां पर प्रभु सब दिन रहते हैं। ऐसे में मंदाकिनी में दीपदान से उनका सानिध्य मिलता है। इसलिए बड़ी संख्या में दीपदान के लिए श्रद्धालु मेले में आते हैं और रामघाट से लेकर तमाम मठ मंदिरों में दीपदान करते हैं।
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