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बांदा डीपीआरओ नें सचिवों के घोटाले की जांच ठंढे बस्ते में दबाई ? सत्यनिष्ठा पर उठ रहे सवाल ?
उत्तर प्रदेश

बांदा डीपीआरओ नें सचिवों के घोटाले की जांच ठंढे बस्ते में दबाई ? सत्यनिष्ठा पर उठ रहे सवाल ?

  • विनोद मिश्रा

बांदा। डीपीआरओ नें सचिवों द्वारा ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों में सवा करोड़ से अधिक के फर्जीबाड़े की जांच दबा दी है? 22 सचिवों ने फर्जीवाड़ा कर 1.17 करोड़ का भ्रष्टाचार किया था। इसका खुलासा पंचायती राज विभाग के ई-ग्राम स्वराज पोर्टल की रेंडम जांच में पिछले जुलाई के दूसरे पखवाड़े में हुआ था। जिला पंचायत राज अधिकारी नें इन्हें कारण बताओ नोटिस दी थी, लेकिन सूत्र बताते हैं की जांच “फील गुड” के माध्यम से ठंढे बस्ते में बंद कर दी गई है ? “आश्चर्य है की यदि जांच हुई तो उसके परिणाम उजागर क्यों नहीं हुये” ? मामला सार्वजनिक होना चाहिये था। “कुछ न कुछ तो है जो जांच में गोलमाल का संकेत” सा दे रही है !

बांदा डीपीआरओ नें सचिवों के घोटाले की जांच ठंढे बस्ते में दबाई ? सत्यनिष्ठा पर उठ रहे सवाल ?

आपको इस मामले का पुनः स्मरण करता हूँ। वर्ष 2022-23 में विकास कार्य के लिये पंचम एवं पन्द्रहवें वित्त की धनराशि में कुछ सचिवों ने एक ही फोटो जियोटैग पर कई जगह काम कराना दिखा पोर्टल पर अपलोड कर दिया था। सबसे अधिक फर्जीवाड़ा गर्मी के मौसम में हैंडपंप मरम्मत, रिबोर, तालाब और गड्ढों में पानी भराने सहित अन्य निर्माण कार्यों में हुआ। डीपीआरओ ने इन सभी सचिवों से तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा था।

बांदा डीपीआरओ नें सचिवों के घोटाले की जांच ठंढे बस्ते में दबाई ? सत्यनिष्ठा पर उठ रहे सवाल ?

संतोषजनक जवाब न होने पर निलंबन की बात कही थी, लेकिन एक साल से अधिक बीत गये इस “गजब के भ्रष्टाचार की जांच खामोशी की धुंध” में चली गई है। महान “डीपीआरओ आनंद सरोज आनंद में गगन-मगन” से क्यों हैं ? जांच की “प्रोग्रेस या परिणाम” उजागर क्यों नहीं किया गया? या सचिवों को दंड देने की जगह “क्षमा दान कर दिया” गया ?

बांदा डीपीआरओ नें सचिवों के घोटाले की जांच ठंढे बस्ते में दबाई ? सत्यनिष्ठा पर उठ रहे सवाल ?

इस घोटाले में जिन सचिवों के खिलाफ जांच शुरू हुई थी। इसमें तिंदवारी ब्लाक में पंचायत सचिव प्रभाकर, दिनेश, अजीत पाल, प्रदीप राना, धीरेंद्र कुमार, आकाश वर्मा, नरैनी में सतीश, दिनेश सिंह, बबेरू में कमल यादव, हरिनारायन, शिवलाल, बिसंडा में रामदास, अजीतसिंह अनिल कुमार, अरुण कुशवाहा, अखिलेश, अरविंद कुमार, देवेंद्र, राममूरत, रामचंद्र, प्रमोद कुमार, जसपुरा में योगेश, आनंद मोहन हैं। इस गंभीर मामले में डीपीआरओ आनंद सरोज से उनका पक्ष जानने के लिये काल किया तो रिसीव नहीं हुआ। खैर क्या करते “फिर हमने खबर का गेयर” डाल दिया है। “खबर की तह तक जाने के लिये गेयर हम डालते” ही रहेगें।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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