- विनोद मिश्रा
बांदा । बुंदेलखंड में होगी शहद की बरसात। यह हम नहीं कृषि वैज्ञानिको दावा है। यहां मधु क्रांति की अपार संभावनाएं हैं। परागित फसलों की विविधता को देखते हुए मौनपालन के लिए वार्षिक फसल पंचाग तैयार किया जा रहा है, जिससे पूरे वर्षभर मधुमक्खियों के लिए मकरंद एवं परागकण की आपूर्ति हो सकेगी। कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में कीट विज्ञान विभाग के तत्वावधान में मधुमक्खी पालन पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण की शुरुआत की गई है। इसमे बताया गया कि किसान जलवायु के अनुकूल फसलों का चयनकर अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं।

कृषि महाविद्यालय के कीट विज्ञान विभाग तत्वाधान में अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना मधुमक्खी, परागणकारी एवं पीआइ फाउंडेशन द्वारा आयोजित प्रशिक्षण का कुलपति डॉ. यूएस गौतम ने उद्घाटन किया। विशिष्ट अतिथि एवं मुख्य प्रशिक्षक पूर्व प्राध्यापक डॉ. रामाश्रित सिंह व बिहार के समस्तीपुर स्थित केंद्रीय कृषि विवि के डा. राजेन्द्र प्रसाद ने मधुमक्खी पालन की महत्ता एवं वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खी पालन के तरीकों पर विशेष बल दिया। कुलपति डॉ. यूएस गौतम ने बुंदेलखंड में मधुमक्खी पालन से आय अर्जन की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए कृषकों को समूह में मधुमक्खी पालन करने के लिए प्रेरित किया।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )




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