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बैंक में गबन की जांच क्या हुई प्रभावित : 5 करोड़ 54 लाख का गबन 30 लाख में कैसे आई ?
उत्तर प्रदेश

बैंक में गबन की जांच क्या हुई प्रभावित : 5 करोड़ 54 लाख का गबन 30 लाख पर कैसे आई ?

  • विनोद मिश्रा

बांदा। डिट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक की शाखा ओरन में 30 लाख का गबन में कैशियर सहित तीन जेल चले गये ,जबकि यह तीस लाख नहीं करोड़ों की हेराफेरी है! बैंक के करीब पांच सौ खातों में 5 करोड़ 54 लाख का फर्जीवाड़ा शुरुवाती जांच में पाया गया था।

बैंक में गबन की जांच क्या हुई प्रभावित : 5 करोड़ 54 लाख का गबन 30 लाख में कैसे आई ?
What affected the investigation of embezzlement in the bank: How did the embezzlement of Rs 5 crore 54 lakh come to Rs 30 lakh?

आपको इस मामले के बैक परिदृश्य में ले चल रहा हूँ। जिला कोऑपरटिव बैंक की ओरन शाखा और उनमें वर्ष 2012 से 2018 के बीच कैशियर और शाखा प्रबंधकों की आपस में मिलीभगत से खाताधारकों के खाते से लगभग सवा पांच करोड़ की हेराफेरी उजागर हुई थी! खुलासा हुआ था की अलग-अलग तारीख में खाताधारकों के फर्जी विड्रॉल भरकर और चेक के जरिए तीन करोड़ 17 लाख रुपये निकाले गए। इसके अलावा दो करोड़ 37 लाख 56 हजार 505 रुपये की वित्तीय अनियमितताएं की गईं। इस तरह कुल 5 करोड़ 54 लाख का घोटाला प्रकाश में आया था।

बैंक में गबन की जांच क्या हुई प्रभावित : 5 करोड़ 54 लाख का गबन 30 लाख पर कैसे आई ?
What affected the investigation of embezzlement in the bank: How did the embezzlement of Rs 5 crore 54 lakh come to Rs 30 lakh?

इस मामले में उप महाप्रबंधक उदरेज कुमार प्रजापति के नेतृत्व में 4 सदस्यीय टीम ने जांच की और रिकॉर्ड खंगाले तो बैंक कैशियर से लेकर प्रबंधक तक इस घोटाले में शामिल थे। इनके खिलाफ थाना बिसंडा में मुकदमा भी पंजीकृत हुआ। साथ ही वर्ष 2012 से 2018 के बीच शाखा प्रबंधक रहे विजय शुक्ला और कैशियर नीरज त्रिपाठी को बर्खास्त किया गया था। कर दिया वहीं, शाखा प्रबंधक प्रशांत पांडे, हरिहर प्रसाद कुशवाहा और सर्वेश शुक्ला को निलंबित किया गया।


बताते चलें कि जनवरी 2020 में तत्कालीन उपायुक्त और उप प्रबंधक दीपक सिंह ने सहायक निबंधक व सहायक आयुक्त राजेश कुमार से मामले की जांच कराई थी। इसमें भी 5 करोड़ से ज्यादा के घोटाले से दोषी पाए गए थे, लेकिन तब यह मामला दबा दिया गया था। जब नए सिरे से जांच हुई तो पूरा फर्जीवाड़ा सामने आ गया। लेकिन जांच और आंच का ऐसा घाल -मेल हुआ की गबन का मामला 5 करोड़ 54 लाख से तीस लाख में आ गया। ले देकर जांच प्रभावित कर दी गई।

 

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

 
 



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