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बांदा के शजर पत्थर की अब विदेशों में और बढ़ेगी कदर : मिला जीआई टैग
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बांदा के शजर पत्थर की अब विदेशों में और बढ़ेगी कदर : मिला जीआई टैग

  • विनोद मिश्रा

बांदा। केन नदी में पाये जाने वाले शजर पत्थर की कदर अब बढ़ेगी। नदी का यह नायाब पत्थर देश -विदेश की नजरों में नगीना बन जाऐगा। एक जिला, एक उत्पाद के तहत बांदा के इस अनमोल शजर पत्थर को जीआई टैग का तमगा हासिल हो गया है। नाबार्ड जीआई टैग उत्पादों को उचित सुविधाएं मुहैया कराएगा।

बांदा के शजर पत्थर की अब विदेशों में और बढ़ेगी कदर : मिला जीआई टैग
Banda’s shajar stone will now be more appreciated in foreign countries: got GI tag

जीआई विशेषज्ञ पद्मश्री डाॅ. रजनीकांत ने यह जानकारी दी हैं। बताया कि प्रदेश से जीआई टैग के लिए 20 आवेदनों में मिले थे। इनमें शजर सहित 11 उत्पादों को ही यह उपलब्धि हासिल हुई । आपको बता दें कि विदेशों में भी शजर की काफी मांग है। नाबार्ड और राज्य सरकार के सहयोग से शजर पत्थर को जीआई टैग मिला है। नाबार्ड शजर को आगे ले जाने का काम करेगा, जिससे सभी हस्तशिल्पियों को इसका लाभ मिल सके।

बांदा के शजर पत्थर की अब विदेशों में और बढ़ेगी कदर : मिला जीआई टैग
Banda’s shajar stone will now be more appreciated in foreign countries: got GI tag

केन नदी में पाया जाने वाला शजर पत्थर बेशकीमती उपहारों में शामिल है। सुंदरता और अनोखेपन के लिए यह पत्थर देश-विदेश में मशहूर है। ज्वैलरी और सजावटी सामान में इसका इस्तेमाल ज्यादा होता है। दशकों पूर्व शजर पत्थर बड़े उद्योग के रूप में स्थापित था। इराक, इरान, सऊदी अरब से आने वाले सैलानी यहां से शजर पत्थर खरीद ले जाते थे।

बांदा में शजर पत्थर तराशने का काम करने वाले लगभग 60-70 व्यापारी थे, लेकिन मांग घटने के साथ ही धीरे-धीरे कारखाने बंद होते गए। गिने-चुने लोग ही इस कारोबार से जुड़े रहे। एक जिला-एक उत्पाद में शजर पत्थर का चयन होने के बाद फिर इस व्यवसाय ने परवान चढ़ना शुरू कर दिया। मौजूदा में लगभग 20 व्यापारी कर्ज लेकर इसका व्यवसाय कर रहे हैं।

बांदा के शजर पत्थर की अब विदेशों में और बढ़ेगी कदर : मिला जीआई टैग
Banda’s shajar stone will now be more appreciated in foreign countries: got GI tag

केन नदी में मिलने वाला अनमोल शजर पत्थर प्राकृतिक चित्रकारी के लिए मशहूर है। पेड़-पौधे, सुंदर तस्वीरें समेत अन्य प्राकृतिक आकृतियां पत्थर पर पाई जाती हैं। हालांकि इनमें आकृतियां उभारने का काम हस्तशिल्पियों द्वारा किया जाता है। शजर पत्थर आम पत्थरों की तरह रंगीन पत्थर की तरह दिखता है। इसकी पहचान शजर पत्थर से जुड़े लोग ही कर पाते हैं। सावधानी से तोड़ने के बाद इसे कड़ी मेहनत से तराशा जाता है।

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

 
 



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