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बुंदेलखंड की होगी "बल्ले -बल्ले" : अरहर दाल विश्व को कर देगी "स्वस्थ एवं मस्त" !
उत्तर प्रदेश

बुंदेलखंड की होगी “बल्ले -बल्ले” : अरहर दाल विश्व को कर देगी “स्वस्थ एवं मस्त” !

  • विनोद मिश्रा

बांदा। बुंदेलखंड की दाल को विश्व पहचान दिलाने की पहल शुरू हो गई है। अब तो सरकार नें यहां की अरहर दाल को “जीआई टैग” दिलाने का निर्णय लेकर “बल्ले -बल्ले” कर दी है।

बुंदेलखंड की होगी "बल्ले -बल्ले" : अरहर दाल विश्व को कर देगी "स्वस्थ एवं मस्त" !
Bundelkhand will be “Balle-Balle”: Arhar Dal will make the world “healthy and cool”!

आपको बता दूँ की बुंदेलखंड में अरहर दाल की खेती को उच्च पायदान पर लाने के लिये वर्ष 2020 की फरवरी में कालिंजर में “विश्व स्तरीय कृषि विशेषज्ञ सम्मेलन” भी हुआ था। बुंदेलखंड में ये पहला मौका था जब एक जगह पर एक साथ पद्मश्री किसान और कृषि विशेषज्ञ इकट्ठा हुए थे। कार्यक्रम में बुलंदशहर, यूपी के पद्मश्री डॉ भारत भूषण त्यागी, मध्य प्रदेश के सतना के पद्मश्री बाबूलाल दहिया, उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के किसान पद्मश्री रामसरन वर्मा, बिहार के मुजफ्फरपुर की पद्मश्री राजकुमारी देवी किसान चाची, हरियाणा के सोनीपत के पद्मश्री कंवल सिंह चौहान ने अपने अनुभवों को किसानों से साझा किया था।

बुंदेलखंड की होगी "बल्ले -बल्ले" : अरहर दाल विश्व को कर देगी "स्वस्थ एवं मस्त" !
Bundelkhand will be “Balle-Balle”: Arhar Dal will make the world “healthy and cool”!

वैसे भी यहां की अरहर स्वाटिष्ट और स्वास्थवर्धक है। हमें ब्रांडिग करनी चाहिए, जिससे देशभर में हमारे क्षेत्र की फसलों की मांग बढ़ेगी। जिससे ज्यादा मांग के चलते किसानों की आय में वृद्धि होगी। बुंदेलखंड में दलहन (अरहर, चना, मसूर) और तिलहन की खेती के लिए जाना जाता है, लेकिन बाजार के अभाव और खेती की सही जानकारी नहोने से उचित फायदा नहीं मिल पाता।

बुंदेलखंड की होगी "बल्ले -बल्ले" : अरहर दाल विश्व को कर देगी "स्वस्थ एवं मस्त" !
Bundelkhand will be “Balle-Balle”: Arhar Dal will make the world “healthy and cool”!

बुंदेलखंड में इस वर्ष खेती में अरहर का रकबा 17753 हेक्टेयर है। सिंचाई सुविधा उपलब्ध न होने पर भी यहां पर दलहन की अच्छी पैदावार होती है। लेकिन अब जीआई टैग से बुंदेली दाल का जल -जला होगा। क्योंकि किसी भी कृषि एवं प्रसंस्कृत उत्पाद की विशेषता एवं उसके भौगोलिक क्षेत्र प्रदर्शित करने के लिये जीआई टैग दिलाया जाता है। इसके मिल जानें से जहां उस उत्पाद को कानूनी संरक्षण मिलता है वहीं अंतर्राष्ट्रीय बाजार में उसकी शाख बढ़ती है।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

 
 



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