- विनोद मिश्रा
बांदा। बजट के अभाव में पीएम आवास योजना “गोल्ड” नहीं हो पा रही। आवासीय योजना पिच पर बोल्ड हो गई है। बजट की अंतिम “तीसरे ओवर की बालिंग” नहीं हो रही। इस कारण प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के आवास तीसरी किस्त के अभाव में अधूरे हैं। लाभार्थी परेशान हैं। चालू वित्तीय वर्ष 2022-23 के छह माह बीत जाने के बाद भी नए आवासों का लक्ष्य और बजट नहीं मिला। पक्के मकानों के सपनों पर पानी सा फिर गया है।

जिले को वित्तीय वर्ष 2021-22 में 13,842 आवासों का लक्ष्य मिला था। इनमें 13,042 परिवारों को पहली, दूसरी और तीसरी किस्त मिली है। इन लोगों के आवास बन भी गए हैं, लेकिन 800 ऐसे परिवार हैं, जिन्हें तीसरी किस्त नहीं मिली।आवास अधूरे पड़े हैं। चालू वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए जिले को आवासों का कोई लक्ष्य नहीं मिला। ऐसे में नए लाभार्थी भी परेशान है।

मुख्य विकास अधिकारी वेद प्रकाश मौर्य का इस संदर्भ में वेद पाठ यह है की पिछले वित्तीय वर्ष के 94 फीसदी से अधिक आवास पूरे हो गए हैं। शेष आवासों का निर्माण भी जल्दी अंजाम तक पहुंचेगा। चालू वित्तीय वर्ष में नए आवासों का लक्ष्य और बजट नहीं मिला। लक्ष्य मिलने पर नए लाभार्थियों का चयन होगा।
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