- विनोद मिश्रा
बांदा। लुका -छिपी के बीच बरखा रानी को इतराते लगभग तीन महीने हो गये रनगवां बांध पर कृपा ऐसी बरस गई की पूरे हो चुके हैं। इस वर्ष रनगवां में जल संचय का रिकार्ड बन गया हैं। कुल संग्रहण क्षमता का 58 फीसदी पानी अपने आगोश में समेट लिया। इतने पानी से बुंदेलखंड किसान खेतों को रबी सीजन में तीन बार सींच सकेंगे।

सरकारी समझौते के तहत बांध से सिंचाई के लिए यूपी को 70 फीसदी और एमपी को 30 फीसदी पानी मिलता है। बारिश में इस बांध में पानी एकत्र होता है। फिर बुंदेलखंड में खेतों की सिंचाई के लिए पानी केन नहर से से मिलती है। रनगवां बांध के पानी से बुंदेलखंड में रबी की फसल की सिंचाई होती है। रबी की फसल को देखते हुए नवंबर से इस बांध के पानी को केन नहर के माध्यम से बुंदेलखंड में सिंचाई के लिए छोड़ा जाता है। इस बार करीब 12 साल बाद रनगवां बांध में इतना पानी एकत्र हुआ कि कम से कम तीन बार फसलों की सिंचाई हो सकती है।
आपको बता दें की चार साल से रनगवां बांध में पानी कुल क्षमता का 25 से 30 फीसदी ही एकत्र हो पा रहा था । करीब 70 फीसदी तक पानी की कमी ही रही। इसलिए रबी की फसल को सिर्फ एक बार ही पानी मिलता था। पैदावार लगातार प्रभावित थी। इस बार 58 फीसदी तक बांध में पानी आ जाने से रबी की फसल की तीन बार सिंचाई हो जाएगी। पैदावार भी बढ़ेगी। सिंचाई के विभाग के मुताबिक रनगवां बांध की क्षमता 5800 एमसीएफटी (लाख घन फुट) है। चार साल बाद औसत बारिश होने से करीब 58 फीसदी तक पानी एकत्र हुआ है। बांध क्षेत्र में अब तक करीब 630 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गई है।
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