- विनोद मिश्रा
बांदा। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ नें जिले में अविरल गीता ज्ञान के प्रवाह की रविवार को पृष्ठभूमि तैयार कर दी। अब घर -घर गीता का “नाद” गुंजायमान होगा।

संघ द्वारा नित्य गीता स्वअध्याय संकल्प ज्ञान यज्ञ का यहां अद्भुत आध्यात्मिक आयोजन हुआ।इसमें मुख्य मार्ग प्रमुख कानपुर प्रांत अमर नाथ नें बोध कराया की भारतीय संस्कृति में गीता का स्थान सर्वोच्च है।

भारतीय अन्तरतम में वीणा की झंकार की तरह गीता के श्लोक झंकृत होते हैं। जीवन-सुधार परक उपदेश, नीति-नियमों का जो भी ज्ञान दिया जाता है, उसमें गीता का प्रकाश कहीं न कहीं अवश्य पड़ता है। धरती पर शायद ही ऐसा कोई स्थान हो, जो गीता के प्रभाव से मुक्त हो।

मुख्य अतिथि गीता भावार्थ प्रसार मिशन मथुरा के जगमोहन बाबू नें गीता को, धर्म-अध्यात्म समझाने वाला अमोल काव्य की संज्ञा दी। कहा की सभी शास्त्रों का सार एक जगह कहीं यदि इकट्ठा मिलता हो, तो वह जगह है-गीता।

शिक्षाविद एवं संघ के विभाग मार्ग प्रमुख रुद्र प्रसाद मिश्रा नें कहा की गीता का ज्ञान ही अपने आप में इतना सक्षम है कि इसे पाने के बाद और कुछ पाने की जरूरत ही नहीं पड़ती।मनुष्य को संपूर्ण बनाने के लिए जो भी तत्त्व आवश्यक है, वह सब गीता में है।

अध्यक्षता कर रहे डाक्टर रामनारायण त्रिपाठी नें कहा गीताअमृत है। इसके प्रचार -प्रसार एवं घर -घर इसके स्वाध्याय का जो यहां संकल्प लिया गया है अति सराहनीयअद्भुत एवं अकल्पनीय है। इस अवसर पर कालेजों,महाविद्यालयों के क्रमशः प्रधानाचार्य, प्राचार्य, व्यापारी नेता आदि प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे। गीता की अविरल धारा बहती रहे इसका संकल्प लिया गया।
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