- विनोद मिश्रा
बांदा। डीएम अनुराग पटेल के आगे प्राथमिक शिक्षा के गुणवत्ता की पोल रेत के महल की तरह ढह गई। बच्चे ज्ञानी की बजाय अज्ञानी निकले। डीएम यह हालत देख शिक्षकों से खफा हुए। सुधार के लिये एक माह का समय दिया।

यह वाक्या प्राथमिक विद्यालय, तुर्रा द्वितीय, क्षेत्र नरैनी का है। यहां डीएम अनुराग नें औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के समय राजरानी शिक्षा मित्र अनुपस्थित मिली। स्पष्टीकरण मांगा गया तथा एक दिन का मानदेय भी रोका।जिलाधिकारी नें छात्र-छात्राओं के उपस्थिति पंजीका का अवलोकन किया। गया। विद्यालय में कुल 197 बच्चो के सापेक्ष 118 बच्चे उपस्थित थे ।

प्राथमिक विद्यालय, तुर्रा द्वितीय में जिलाधिकारी द्वारा कक्षा-5 के बच्चों को लगभग एक घण्टा पढ़ाया गया। कक्षा 5 के छात्र शिवशंकर, काजल, अनीता, प्रिया एवं गीता से पहाड़ा सुना गया, परन्तु काजल 16 का पहाड़ा नही सुना पायी। इसके साथ ही कक्षा 5 के बच्चो से हिन्दी मे “शाम को जल्द नींद आती है” लिखवाया गया, परन्तु छात्र शिवशंकर को छोड़कर कोई भी बच्चे शुद्व हिन्दी नही लिख सके।

इसके अतिरिक्त बच्चों से सामान्य जानकारी यथा प्रदेश के मुख्यमंत्री, राष्ट्रपति आदि का नाम पूंछा गया परन्तु बच्चो को इस सम्बन्ध मे कोई जानकारी नही थी। जिलाधिकारी नें विद्यालय की पठन-पाठन की स्थिति खराब पाये जाने पर नाराजगी व्यक्त की। निर्देशित किया गया कि एक माह के अन्दर बच्चों को मानक के अनुसार पठन-पाठन की गुणवत्ता में सुधार लाया जाये। अन्यथा कड़ी कार्यवाही की जायेगी।
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