- विनोद मिश्रा
बांदा। प्रधानमंत्री आवास योजना में अब लेखपालों की मनमानी नहीं चलेगी। परियोजना अधिकारी ने इस पर अंकुश लगाने के लिए नई पहल की है। लेखपाल यदि किसी को पात्रता के बावजूद अपात्र ठहराता है तो आवेदक को आपत्ति दाखिल करने का मौका मिलेगा। साथ ही पात्र किए गए आवेदकों की क्रास चेकिंग होगी। यदि गलत चयन किया है तो लेखपालों पर इसकी जवाबदेही तय होगी।

आवाज उठती रही कि प्रधानमंत्री आवास योजना लेखपाल और डूडा विभाग से संबद्ध संस्था के अवर अभियंताओं के लिए कमाई का जरिया बन गई है। लेखपाल के मुंशी और जेई के साथ रहने वाले कुछ प्राइवेट कर्मी आवास के लिए खुलेआम ठेका लेते हैं। भले ही सुविधा संपन्न हो, दूसरी जगह की फोटो खींचकर जीओ टैगिंग कर दी जाती है, और अपात्र को योजना का लाभ दे दिया जाता है। परियोजना अधिकारी ने इस योजना को भ्रष्टाचार के भंवरजाल से निकालने के लिए कार्य योजना बनाई है। पीएम आवास योजना शहरी के लिए जनपद के नगरीय क्षेत्र में रहने वाले 18,133 लोगों ने आवेदन किया है। इसमें 13,898 लाभार्थियों को लेखपालों ने पात्रता की मुहर लगाई है।

बांदा शहर के 74 लाभार्थियों को अपात्र करार दिया है। जबकि वास्तविकता में इनमें आधे से ज्यादा ऐसे हैं, जो पात्र हैं। अब ऐसे आवेदक डूडा विभाग व नगर निकाय में आपत्ति दाखिल कर सकेंगे। सभी नगर निकायों व डूडा में अपात्रों की सूची चस्पा की गई है। आपत्ति आने पर इनकी दोबारा जांच कराई जाएगी। पात्र होने पर उन्हें आवास मुहैया कराया जाएगा। इसके अलावा 13,898 लाभार्थियों में 20 लोगों की जांच रेंडम आधार पर कराई जाएगी। यदि इनमें अपात्र मिले तो उनसे रिकवरी होगी। साथ ही संबंधित लेखपाल की जवाबदेही तय कर दी जाएगी।
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