- विनोद मिश्रा
बांदा। निजी विद्यालयों को मान्यता देने में लापरवाही करने पर बेसिक शिक्षा निदेशक ने बांदा और चित्रकूट बीएसए से दो दिन में स्पष्टीकरण मांगा है। बांदा से 11 और चित्रकूट से एक विद्यालय की मान्यता के लिए पोर्टल पर आवेदन किया गया था। 31 मार्च तक इसके लिए तिथि निर्धारित थी। निस्तारित न करने पर ये आवेदन निरस्त हो गए। इस पर निदेशालय ने कड़ी नाराजगी भी जाहिर की है।

अशासकीय सहायता प्राप्त नवीन प्राथमिक व जूनियर विद्यालयों की मान्यता के लिए निदेशालय ने मान्यता पोर्टल बना रखा है। विद्यालयों के संचालक इसी पोर्टल पर आवेदन करते हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी अपने स्तर से इसे निर्धारित समय निस्तारित करते हैं। बांदा जनपद में प्राथमिक स्तर के लिए पांच और जूनियर स्तर के विद्यालयों की मान्यता के लिए छह आवेदन पोर्टल पर किए गए थे। जबकि चित्रकूट जनपद से प्राथमिक विद्यालय की मान्यता के लिए एक आवेदन किया गया था। निदेशालय की तरफ से इन आवेदनों के निस्तारण के लिए 31 मई 2021 से लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं। 31 मार्च तक निस्तारण के लिए अंतिम तिथि थी।
इसके बावजूद दोनों बीएसए ने मान्यता संबंधी प्रकरण पर कोई गंभीरता नहीं दिखाई। बेसिक शिक्षा निदेशक डा.सर्वेंद्र विक्रम सिंह ने बांदा बेसिक शिक्षा अधिकारी राम पाल सिंह और चित्रकूट बीएसए राजीव रंजन को पत्र जारी कर इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि इसके पूर्व 29 मार्च को भी पत्र जारी कर कहा गया था कि 31 मार्च तक मान्यता संबंधी आवेदनों का निस्तारण कराएं, अन्यथा ये स्वत: निरस्त हो जाएंगे। इसकी जिम्मेदारी बेसिक शिक्षा अधिकारियों की होगी। इसके बावजूद इन आवेदनों का निस्तारण नहीं किया गया। यह अत्यंत खेदजनक है। उन्होंने कहा है कि मान्यता संबंधी मामलों को जनहित गारंटी अधिनियम में भी शामिल किया गया है। यह पोर्टल मुख्ययंत्री के कार्यालय के दर्पण पोर्टल से भी लिंक है। हर माह इसकी समीक्षा भी की जाती है। निदेशक ने 18 मई तक दोनों बेसिक शिक्षा अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है।

– मान्यता में चलता है लेन-देन का लंबा खेल
निजी विद्यालयों की मान्यता लेना टेढ़ी खीर है। यदि कोई उच्च शिक्षित युवक विद्यालय के जरिए रोजगार करना चाहता है तो उसे लंबा चढ़ावा चढ़ाना पड़ता है। बेसिक शिक्षा विभाग से लेकर फायर ब्रिगेड में एनओसी के लिए भी फेरे लगाने पड़ते हैं। इसी वजह से आवेदन लंबित रहते हैं और निस्तारण नहीं होता पाता है।
बांदा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रामपाल सिंह का कहना है कि निजी विद्यालयों की मान्यता के लिए जो भी आवेदन आए हैं, उनमें कमियां हैं इसलिए निस्तारित नहीं हो पाए हैं। निदेशालय को स्पष्टीकरण दिया जाएगा।
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