- विनोद मिश्रा
बांदा। बुंदेलखंड के लिए कृषि विश्वविद्यालय दलहन की कई नई प्रजातियां विकसित कर रहा है। क्षेत्र के अनुकूल प्रजातियां विकसित होने पर कृषकों के लिए उन्नतशील प्रजातियां उपलब्ध हो जाएंगी। यह बातें कुलपति प्रो.एनपी सिंह ने गुरुवार को विश्व दलहन दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में कहीं।

कृषि महाविद्यालय सभागार में कृषि महाविद्यालय एवं कृषि विज्ञान केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में कुलपति डा.सिंह ने कहा कि मानव जीवन के स्वास्थ्य के लिए दलहन का उपभोग बेहद जरूरी है। दलहन एवं दलहन से निर्मित खाद्य पदार्थ को प्रति दिन के भोजन में शामिल करना होगा। ताकि हम कुपोषण से दूर रहें। बुंदेलखंड में पिछले कुछ वर्षो में दलहन के उत्पादकता में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है, जो कि समृद्धि का संकेत है। उन्होंने कहा कि एक किलो दलहन उत्पादन के लिए लगभग एक लीटर पानी तथा उत्सर्जन के रूप में सिर्फ एक किलो कार्बन डाईआक्साइड निकलता है। दलहन उत्पादन से न सिर्फ वातावरण, बल्कि स्वच्छ जल का कम से कम प्रयोग होता है। बुंदेलखंड परिक्षेत्र में दलहन की उत्पादकता बढ़ाना जरूरी है। साथ ही दलहन के उत्पाद का मूल्य संवर्धन भी अतिरिक्त आय के लिए जरूरी है। कृषि विश्वविद्यालय लगभग सभी दलहनी फसलों पर अपने महत्वपूर्ण शोध कार्यो को आगे बढ़ा रहा है। जिससे भविष्य में क्षेत्रानुकूल प्रजातियां विकसित होने तथा कृषकों के लिए उन्नतशील प्रजातियां उपलब्ध होने में कारगर साबित होंगी। निदेशक प्रसार प्रो. एनके वाजपेयी ने कहा कि यह क्षेत्र मुख्य तौर पर मोटे अनाज एवं दलहनी फसलों के लिए जाना जाता है।

बुंदेलखंड परिक्षेत्र में सीमित संसाधनों एवं जागरूकता की कमी से दलहन का उत्पादन औसत उत्पादन से भी कम है। इस दौरान दलहन उत्पादन में वैज्ञानिक तकनीकी अपनाकर ज्यादा उपज लेने वाले नौ किसान शिवकुमार, योगेंद्र सिंह,प्रशांत, रणविजय, अशोक सिंह,शिवनारायण, अशोक सिंह तथा दलहन प्रसंस्करण के लिए किसान लवलेश कुमार तथा असमा खातून को सम्मानित किया गया। डा. नरेन्द्र सिंह,डा. सौरभ, डा. जगन्नाथ पाठक, डा. सीएम सिंह ने व्याख्यान के माध्यम से दलहन उत्पादन पर अपनी प्रस्तुती दी। इस अवसर पर छात्रों व स्वंयसेवी सहायता समूह की ओर से दलहनी खाद्य पदार्थों का स्टाल लगाया गया। कार्यक्रम आयोजक प्रो. जीएस पंवार ने आभार जताया। इस मौके पर केबीके अध्यक्ष डा. श्याम सिंह, डा.बीके गुप्ता, कुलसचिव डा. एसके सिंह मौजूद रहे।
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