- विनोद मिश्रा
बांदा। चित्रकूटधाम मंडल के एकमात्र राजकीय मेडिकल कॉलेज में कोरोना काल में प्रबंधकीय व्यवस्था निकम्मे पन की शिकार हो गई। कोरोना काल में इससे बड़ा नकारापन क्या होगा की मैन पावर की जरूरत होते हुये भी डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी बढ़ाने के लिए शासन से मिले बजट को ही लौटा दिया गया। अतिरिक्त स्वास्थ्य कर्मियों की नियुक्ति नहीं की गई। इसी तरह क्वारंटीन हुए डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मियों के लिये आये बजट भी बिना खर्च किए सरेंडर कर दिया गया।

इस प्रकार दोनों मदों का कुल 23 लाख रुपये मेडिकल कॉलेज द्वारा जिला स्वास्थ्य समिति को सरेंडर कर दिया गया। पिछले वर्ष से कोरोना की गिरफ्त में आए चित्रकूटधाम मंडल के संक्रमित अधिकांश गंभीर मरीज बांदा राजकीय मेडिकल कॉलेज में ही लाए जा रहे थे। मेडिकल कॉलेज एल-2 हास्पिटल में बदल दिया गया था। चारों जनपदों बांदा, हमीरपुर, महोबा और चित्रकूट के हजारों मरीज यहां भर्ती किए गए। कई सैकड़ा की मौतें भी हुईं। उधर, शासन ने राजकीय मेडिकल कॉलेज को वर्ष 2020-21 में एनएचएम से एक्टिव क्वारंटाइन स्टेयरिंग की व्यवस्थाओं के लिए 18 लाख रुपये दिए थे। यह बजट क्वारंटाइन हुए डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों पर खर्च होना था।

राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने यह पूरा का पूरा बजट वापस कर दिया। हालांकि, क्वारंटीन डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मियों को कई असुविधाएं भी रहीं। अधिकांश अपने घरों में ही रहे। इसी तरह कोरोना के मद्देनजर शासन ने पिछले वर्ष नेशनल हेल्थ मिशन मद से राजकीय मेडिकल कॉलेज में अतिरिक्त मानव संसाधन (स्टाफ) बढ़ाने के लिए पांच लाख रुपये दिए थे। यह भी खर्च नहीं किए गए और पूरे के पूरे जिला स्वास्थ्य समिति को सरेंडर कर दिए गए।यह कोई हवा-हवाई खबर नहीं है, यह जानकारी जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत राजकीय मेडिकल कॉलेज के जन सूचना अधिकारी डॉ. वीरेंद्र सिंह यादव ने दी है।

हाँ इस मिली जानकारी के क्रम में भोजन का पैसा कथित गोल-माल कर पूरा “भोजन खर्च” कर लिया गया।शासन ने नेशनल हेल्थ मिशन मद से पिछले वर्ष राजकीय मेडिकल कॉलेज को भोजन प्रबंधन के लिए 33 लाख 5 हजार रुपये दिए थे। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने यह पूरा का पूरा बजट खर्च कर दिया।

अब आश्चर्य यह है की प्रबंधन को दूसरे साल स्टाफ बढ़ाने का होश आया।चालू वित्तीय वर्ष 2021-22 में राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) से मिले बजट से अतिरिक्त मानव संसाधन जुटाने की सुाध आई। पिछले साल जहां इस मद का पूरा बजट लौटा दिया गया था, वहीं इस वर्ष मिले 16 लाख 58 हजार 566 रुपये बजट में अब तक पांच लाख 21 हजार 224 रुपये खर्च किए जा चुके हैं। 11 लाख 37 हजार 342 खर्च होना शेष है।आखिर निकम्मे प्रबंधन को कारण बतओ नोटिस नहीं जारी होनी चाहिऐ! यह विचारणीय मुद्दा तो ही।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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