
- विनोद मिश्रा
लखनऊ। सपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने ‘पीडीए’ अभियान को ‘जन-आंदोलन ‘का रूप दे दिया है। पिछले कई महीनों से ‘बिना रुके, बिना थके प्रदेश के गांव-गांव में बैठकें’ कर रहे नसीमुद्दीन की ‘मेहनत अब जमीन’ पर दिखने लगी है। इससे एक तरफ ‘सपा का जनाधार मजबूत हो रहा है, तो दूसरी तरफ सत्ता पक्ष के खेमे में बैचैनी बढ़’ गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी का “फॉर्मूला सीधा” है की “पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक को एक मंच पर लाओ”। इसी “रणनीति के तहत वे लगातार दौरे” कर रहे हैं और “कार्यकर्ताओं को नई धार” दे रहे हैं। इसी क्रम में 17 अगस्त को नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने जनपद श्रावस्ती के ग्राम मैनिवां, कटारा और कस्बा इकौना में पूर्व प्रधान उबैद एवं पूर्व जिलाध्यक्ष वसीउल्ला के आवास पर “घंटों बैठकें” कीं।
यहां कार्यकर्ताओं को “बूथ स्तर तक संगठन खड़ा करने के निर्देश” दिए। इसके बाद बहराइच पहुंचकर उन्होंने नगर के मोहल्ला किला में “हर्षित त्रिपाठी और तारिक एडवोकेट” के आवास पर पार्टीजनों से मुलाकात की। दोनों ही बैठकें क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी रहीं और “भारी भीड़” जुटी।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी की “पीडीए बैठकों” से “पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक” का एकजुट होना “सत्ता दल के लिए सबसे बड़ी चिंता” बन गया है। अंदरखाने माना जा रहा है कि 2027 से पहले इस गठजोड़ को तोड़ना उनके लिए “सबसे बड़ी चुनौती” है।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने बैठक में कहा की “हम थकेंगे नहीं, रुकेंगे नहीं। “पीडीए की ताकत” ही “उत्तर प्रदेश का भविष्य” तय करेगी।” कुल मिलाकर नसीमुद्दीन सिद्दीकी की “मेहनतपूर्ण बैठकें सपा में नई जान फूंकनें” का कार्य कर रहीं हैं। और “सत्ता पक्ष के लिए सिरदर्द” बन गई हैं।
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