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चंदेलकालीन धरोहरों को मिलेगा 'नया जीवन': इतिहास की 'बिखरी कड़ियां' फिर होंगी 'मजबूत'
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चंदेलकालीन धरोहरों को मिलेगा ‘नया जीवन’: इतिहास की ‘बिखरी कड़ियां’ फिर होंगी ‘मजबूत’

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

चित्रकूट। बुंदेलखंड की धरती में ‘दफन’ सदियों ‘पुराने इतिहास’ को अब ‘संरक्षण का नया सहारा’ मिलने जा रहा है। चित्रकूट की चंदेलकालीन धरोहरों को ‘संवारने’ की बड़ी पहल शुरू हो गई है। भरतकूप के निकट ग्राम गोंडा में स्थित चंदेलकालीन दो प्राचीन मंदिरों के ‘क्षतिग्रस्त और दरारयुक्त’ मंडपों के ‘संरक्षण एवं पुनर्स्थापन’ का कार्य भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने शुरू कराया है।

चंदेलकालीन धरोहरों को मिलेगा 'नया जीवन': इतिहास की 'बिखरी कड़ियां' फिर होंगी 'मजबूत'करीब 15 लाख रुपये की लागत से होने वाला यह संरक्षण कार्य सिर्फ पत्थरों और मंदिरों की मरम्मत तक सीमित नहीं है, बल्कि बुंदेलखंड की ‘प्राचीन स्थापत्य कला और ऐतिहासिक विरासत’ को आने वाली ‘पीढ़ियों के लिए सुरक्षित’ रखने की महत्वपूर्ण कोशिश है। गोंडा गांव में स्थित दोनों प्राचीन मंदिरों के मंडप लंबे समय से क्षतिग्रस्त अवस्था में हैं। मंडप में दरारें पड़ने के साथ ही कई हिस्से ‘भग्नावशेष में तब्दील’ हो गए हैं।

चंदेलकालीन धरोहरों को मिलेगा 'नया जीवन': इतिहास की 'बिखरी कड़ियां' फिर होंगी 'मजबूत'अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने इस दिशा में ‘कदम’ बढ़ाया है। जिस ‘स्थापत्य तकनीक’ से ‘सदियों’ पहले यह ‘संरचना खड़ी’ की गई थी, उसी ‘ऐतिहासिक स्वरूप’ को ध्यान में रखते हुए मंडप को ‘रीसेट और पुनर्स्थापित’ किया जाएगा। मंदिर के सिर्फ मंडप को ही नहीं, बल्कि इसके ‘क्षतिग्रस्त प्लेटफॉर्म और सीढ़ियों का भी संरक्षण’ किया जाएगा। ऐतिहासिक धरोहर को ‘संरक्षित’ रखने के लिए मंदिर परिसर की ‘चारदीवारी की मरम्मत’ भी कराई जाएगी। इसके बाद ‘चारदीवारी पर ग्रिल’ लगाई जाएगी, जिससे ‘स्मारक को अधिक सुरक्षित’ रखा जा सके।

चंदेलकालीन धरोहरों को मिलेगा 'नया जीवन': इतिहास की 'बिखरी कड़ियां' फिर होंगी 'मजबूत'चंदेलकालीन मंदिरों का यह ‘संरक्षण अभियान’ दरअसल ‘बुंदेलखंड के उस इतिहास’ को बचाने की कोशिश है, जो समय की मार से ‘धीरे-धीरे’ कमजोर हो रहा था। करीब 15 लाख रुपये की लागत, वैज्ञानिक संरक्षण तकनीक, राजस्थान से विशेष कारीगरों की टीम और मूल स्वरूप में ‘पुनर्स्थापन की योजना’ इन सबके जरिए ‘गोंडा’ की ‘चंदेलकालीन धरोहरों’ को फिर से ‘मजबूती’ देने की तैयारी है।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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