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डायरिया और बुखार का कहर: जिला अस्पताल में बेड फुल, मरीजों की भीड़ से अफरा-तफरी !
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डायरिया और बुखार का कहर: जिला अस्पताल में बेड फुल, मरीजों की भीड़ से अफरा-तफरी !

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

  • शरद मिश्रा

बांदा। बरसात की चंद बौछारें और तपती धूप के मिलन ने जिले में कहर बरपा दिया है। मौसमी बदलाव के बीच डायरिया और वायरल बुखार का प्रकोप तेज़ी से फैल रहा है।

स्वास्थ्य सिस्टम आईसीयू में: डायरिया-बुखार से त्राहिमाम, अस्पताल बेहाल, मरीज बेहिसाब

हालत यह है कि जिला अस्पताल में बेड फुल हो चुके हैं, ट्रामा सेंटर तक में मरीजों को गद्दीदार बेंचों पर लिटाकर इलाज दिया जा रहा है। स्वास्थ्य महकमा अब तक सिर्फ आंकड़े दर्ज करने में मशगूल है, जबकि मरीजों को न दवा मिल रही है, न सुरक्षा।

स्वास्थ्य सिस्टम आईसीयू में: डायरिया-बुखार से त्राहिमाम, अस्पताल बेहाल, मरीज बेहिसाब

रविवार को जैसे ही अस्पताल के दरवाजे खुले, मरीजों की भीड़ टूट पड़ी। पर्चा काउंटर के सामने लंबी लाइनें लगी रहीं। दोपहर तक 1200 से अधिक मरीजों का रजिस्ट्रेशन हुआ, जिनमें अधिकांश डायरिया, उल्टी-दस्त और बुखार से पीड़ित रहे। ओपीडी बंद होने के बाद भी मरीजों का आना जारी रहा, और उन्हें ट्रामा सेंटर में शिफ्ट किया गया, जहां बेड फुल हो जाने के कारण कई मरीजों को बेंच पर लिटाकर इलाज देना पड़ा।

डायरिया डायन कर रही डिस्को: अस्पतालों में मरीज़ों की बढ़ रही भीड़, सिस्टम लाचार

इलाज के बाद जब मरीजों को पर्चे में दवाएं लिखी गईं, तो उन्हें सरकारी दवा वितरण काउंटर पर घंटों इंतज़ार और धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ा। सुरक्षा कर्मी नदारद रहे और मरीजों के बीच तकरार और कहासुनी की नौबत आ गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह रोज़ का दृश्य बन चुका है, लेकिन अस्पताल प्रशासन अब तक कोई पुख्ता इंतजाम नहीं कर पाया।

डायरिया और बुखार का कहर: जिला अस्पताल में बेड फुल, मरीजों की भीड़ से अफरा-तफरी !

डॉ. विनीत सचान ने बताया कि “मौसम के बदलाव के कारण डायरिया, वायरल बुखार, पेट दर्द, उल्टी, लू जैसे लक्षण वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इससे ओपीडी और ट्रामा सेंटर में दबाव ज़बरदस्त बढ़ गया है। हालांकि उन्होंने कहा कि सभी मरीजों को यथासंभव इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।

जिले में वायरल फीवर की आई सुमानी, अस्पताल में छाई मनमानी !

स्वास्थ्य विभाग की ओर से न तो कोई जागरूकता अभियान शुरू किया गया है, न ही ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक इलाज की व्यवस्था की गई है। शहरी क्षेत्र के अस्पतालों पर पूरा बोझ पड़ा है, जबकि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मरीजों से खाली पड़े हैं। बांदा में उमस और नमी ने बीमारियों की बाढ़ ला दी है, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं की लचर व्यवस्था ने इसे और भयावह बना दिया है।

 

 

 

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