- विनोद मिश्रा
बांदा। बहुचर्चित नटवरलाल के नाम से मशहूर बर्खास्त सहायक आयुक्त एंव जेल में निरुद्ध सर्वेश दीक्षित के मामले में कल 8 सितंबर को जिला एंव सत्र न्यायलय बांदा में सुनवाई होगी। एक बार फिर बता दे कि आखिर क्या है पूरा मामला ? वह यह है की ढाई माह पूर्व 15 जून 2021 को उद्योग केंद्र के मौजूदा प्रभारी उपायुक्त मोहम्मद जहीरुद्दीन सिद्दीकी ने शहर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करने के लिए तहरीर दी।

इसमें कहा गया कि तत्कालीन सहायक आयुक्त सर्वेश ने लगभग 50 हजार वर्ग फीट रिक्त पड़ी उद्योग केंद्र कार्यालय की भूमि को फर्जी तरीके से अपने पक्ष में पत्र तथा शपथ पत्र बनाकर आयुक्त उद्योग बांदा रामविलास बाजपेयी के फर्जी हस्ताक्षर करके और उपायुक्त उद्योग की मोहर लगाकर भूखंडों की अवैध तरीके से रजिस्ट्री कर दी, जबकि सहायक आयुक्त को यह अधिकार प्राप्त नहीं था। इस तहरीर के आधार पर 17 जून 2021 को शहर कोतवाली में बर्खास्त सहायक आयुक्त सर्वेश कुमार दीक्षित के विरुद्ध धारा 420,467,468,471 आईपीसी में रिपोर्ट दर्ज कर ली।

प्रभारी उपायुक्त द्वारा दर्ज कराई रिपोर्ट में तत्कालीन सहायक आयुक्त सर्वेश कुमार दीक्षित पर फर्जी हस्ताक्षर से अपने पक्ष में शपथ पत्र प्रस्तुत करने, अधिकार न होते हुए भी भूखंडों की रजिस्ट्री करने, अपने हस्ताक्षर के नीचे उपायुक्त उद्योग की मोहर लगाने के आरोप हैं।

– इन्हें आवंटित किए गए भूखंड
1-प्रीति गुप्ता पत्नी अजीत कुमार गुप्ता, (श्रीनाथ विहार, बांदा) : भूखंड संख्या- डी-1, क्षेत्रफल 404.20 वर्ग मीटर, भूखंड संख्या- डी-2, क्षेत्रफल-452.46 वर्ग मीटर, भूखंड संख्या- डी-3, क्षेत्रफल- 396.16 वर्ग मीटर।
2-संतोष कुमार मिश्रा पुत्र रामनारायण (ग्राम भुईली पांडे, मिर्जापुर) : भूखंड संख्या- डी-4, क्षेत्रफल-447.01 वर्ग मीटर।
3-मुन्नी देवी पत्नी स्व. जयराम सविता (ग्राम गुरदहा, हमीरपुर): भूखंड संख्या- डी-5, क्षेत्रफल- 446.96 वर्ग मीटर।
4-अमृता तिवारी पत्नी आशुतोष तिवारी (खूंटी चौराहा, बांदा), पार्टनर रचना त्रिपाठी पत्नी नारायण (ग्राम करहिया, हमीरपुर), भूखंड संख्या- डी-6, क्षेत्रफल- 394.32 वर्गमीटर।

– डीएम के आदेश पर समिति ने की थी जांच
आवंटित भूखंडों के बारे में जिला उद्योग केंद्र के सहायक प्रबंधक रामचंद्र राम द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया कि तत्कालीन डीएम ने 2 जून 2019 को इस प्रकरण की जांच के लिए समिति गठित की थी।
समिति ने चार दिसंबर 2019 को दी अपनी जांच रिपोर्ट में कहा कि उद्योग केंद्र की खाली पड़ी भूमि (प्लाट डी-1 से डी-6 तक) किया गया आवंटन अनियमित और अवैध था। समिति ने कहा कि बांदा विकास प्राधिकरण महायोजना- 2021 में यह प्रश्नगत भूमि का भू उपयोग कार्यालय के लिए निर्धारित है।
अत: इसे आवंटित किया जाना नियम विरुद्ध है। समिति ने आवंटन को निरस्त करने की संस्तुति की। अपर मुख्य सचिव ने दो अक्तूबर 2020 तथा 17 फरवरी 2021 को शासन में हुई बैठक में इन भूखंडों का आवंटन तत्काल निरस्त करने के निर्देश दिए थे।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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