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October 13, 2026
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बांदा : पन्ना टाइगर पार्क में बाघिन की मौत के बाद चार शावक लापता, खोजबीन में जुटे हैं अफसर …

 

  • विनोद मिश्रा

बांदा | बुंदेलखंड के इकलौते बाघ अभ्यारण्य में चार शावकों की मां युवा बाघिन की तीन दिन पूर्व संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। चारों शावक भी लापता बताए जा रहे हैं। पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क प्रशासन के वन कर्मियों और अफसरों की टीमें चारों शावकों की दिन रात तलाश कर रहे हैं। इस काम में पार्क प्रशासन हाथियों की भी मदद ले रहा है। पार्क प्रशासन ने मृत बाघिन के शव का पोस्टमार्टम कराकर विसरा सुरक्षित कर लिया गया है। रिपोर्ट का इंतजार है। उधर, यह भी आशंका जताई जा रही कि बाघिन की मौत कोरोना संक्रमण से हुई हो।


बुंदेलखंड के पन्ना में स्थित टाइगर रिजर्व पार्क में मुख्य रूप से बाघ संरक्षित हैं। इनमें से कई दुर्लभ प्रजातियों के भी हैं। चौतरफा फैले कोरोना संक्रमण के बीच केंद्र सरकार के वन मंत्रालय ने 30 अप्रैल को वन्य जीवों को संक्रमण से बचाने के लिए एडवाइजरी जारी की थी। उधर, अब पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में 15 मई को युवा बाघिन (पी-213) की मौत हो गई। उसका शव टाइगर रिजर्व के वन क्षेत्र के कोनी नाले में पाया गया। इस बाघिन के चार शावक भी हैं। जो बमुश्किल 6 से 8 माह के हैं। यह चारों लापता हैं।
पन्ना टाइगर पार्क के वन कर्मी इन चारों शावकों की तलाश में जुटे हुए हैं। प्रशिक्षित हाथियों पर भी सवार होकर वन कर्मी पूरे इलाकों को खंगाल रहे हैं। शव मिलने के तीन दिन बाद भी शावकों का कुछ पता नहीं चला है। पन्ना टाइगर पार्क रिजर्व सहित जीव जंतु और जंगल आदि पर लगातार कवरेज करने वाले इस क्षेत्र के मीडिया कर्मी अरुण सिंह का कहना है कि शावकों को लेकर वन्य जीव प्रेमियों को भी चिंता है।


मात्र छह वर्षीय बाघिन (पी-213) की मौत के कारणों को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। बाघिन के एक पैर में कुछ सूजन भी बताई गई है। जिस जगह उसका शव मिला है, वहां से आसपास के गांवों के लोगों का आना-जाना भी होता है। यहां से बमुश्किल एक किलोमीटर दूर कोनी गांव है। उधर, कोरोना संक्रमण या वायरल अटैक से भी मौत के कयास लगाए जा रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद यह स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्रीय संचालक (फील्ड डायरेक्टर) उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि 12 मई को सूचना मिली थी कि बाघिन के अगले बाएं पैर में सूजन है। इस पर अगले दो दिनों 13 और 14 मई को वन प्राणी चिकित्सक ने उसका उपचार किया था। डाॅयरेक्टर ने कहा कि पोस्टमार्टम कराया गया है। शव का विसरा सुरक्षित कर लिया गया है। पोस्टमार्टम वन प्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता ने किया। पोस्टमार्टम के दौरान राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के प्रतिनिधि इंद्रभान सिंह बुंदेला और जिला समन्वयक उपस्थित रहे। पोस्टमार्टम के बाद बाघिन के शव का दाह संस्कार कर दिया गया है। फील्ड डायरेक्टर ने कहा कि प्रथम दृष्टतया प्राकृतिक मौत प्रतीत होती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।


– कहीं छिपे हो सकते हैं शावक
मां की मौत के बाद मासूम चार शावकों के जीवन पर खतरा मंडरा रहा है। उनका कुछ पता भी नहीं चल रहा। खोज के लिए सघन अभियान चलाया जा रहा है। यह भी आशंका जताई जा रही कि शावक कहीं पहाड़ या जंगल में सहमे दुबके हुए हों। उन्हें मां का इंतजार हो।


जानकार बताते हैं कि शावकों में अनुशासन बहुत होता है। बाघिन उन्हें जहां छिपाकर निकली होगी शावक वहीं होंगे। बाघिन अपने शावकों को कुछ तरह का आदी बना देती है कि वह कई-कई दिन शावकों से नहीं मिलती। अक्सर रोजाना दूध न पिलाकर तीन से पांच दिन के अंतर में दूध पिलाती है।


बाघिन की मौत के बाद उसका नर साथी बाघ मायूस बताया जा रहा है। साथ ही उसमें कुछ गुस्सा और तनाव नजर आ रहा है। पन्ना टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर के मुताबिक, नर बाघ (पी-243) बाघिन की मौत के बाद असहज देखा जा रहा है। शावकों के मिलने पर नर बाघ कुछ दिन तो उनकी देखरेख कर सकता है, लेकिन दूसरी बाघिन मिलते ही उसके साथ चला जाएगा, जबकि शावकों को अभी कम से कम एक वर्ष सघन देखरेख की जरूरत है। डाॅयरेक्टर ने बताया कि शावकों की तलाश तेजी से चल रही है। इनके मिलने के बाद अगला कदम रेस्क्यू करने और उनके पालन पोषण पर निर्णय लेना होगा। इस बारे में वन विभाग के उच्चाधिकारियों और एनटीसीए से भी सलाह ली जा रही है।


( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश ) 

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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