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रोडवेज 'डीजल घोटाला': वर्षों से 'रिकार्ड' गायब, किसके संरक्षण में होता रहा काला कारोबार ?
उत्तर प्रदेशबुंदेलखंड

बांदा का ‘घोटालेबाज’ रोडवेज: किसके ‘संरक्षण’ में होता रहा ‘काला’ कारोबार ? रिकार्ड गायब !

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। जिले का रोडवेज ‘डीजल घोटालेबाज’ है। करीब 155 बसों वाले रोडवेज डिपो में ‘रोजाना हजारों लीटर डीजल खपता’ है, लेकिन अब इसी डीजल के ‘हिसाब-किताब’ को लेकर ऐसा मामला सामने आया है जिसने ‘पूरे सिस्टम को हिलाकर रख’ दिया है। डिपो के ‘डीजल विभाग’ में कई वर्षों से ‘स्टॉक रजिस्टर’ में सुबह-शाम डीजल की ‘वास्तविक माप दर्ज नहीं’ किए जाने की बात सामने आई है।

रोडवेज 'डीजल घोटाला': वर्षों से 'रिकार्ड' गायब, किसके संरक्षण में होता रहा काला कारोबार ?सवाल उठ रहा है कि जब डीजल का शुरुआती और अंतिम स्टॉक ही दर्ज नहीं हुआ, तो वर्षों से हजारों लीटर डीजल की वास्तविक खपत का मिलान आखिर किस आधार पर होता रहा? मामला सामने आते ही विभागीय व्यवस्था पर ‘सवालों की बौछार’ शुरू हो गई है। ‘घोटाले की आशंका’ से ‘इनकार’ नहीं किया जा सकता, लेकिन इसका ‘वास्तविक सच जांच’ के बाद ही सामने आएगा।

रोडवेज डिपो में डीजल चोरी का बड़ा खेल: 14 हजार लीटर गायब, तीन कर्मचारी निलंबितबांदा डिपो में करीब 155 बसें संचालित होती हैं। इन बसों के संचालन के लिए हर दिन बड़ी मात्रा में डीजल की जरूरत पड़ती है। डीजल की आपूर्ति डिपो के ही डीजल विभाग से होती है। नियम के मुताबिक सुबह टैंक का गेज लेकर स्टॉक दर्ज होना चाहिए, दिनभर बसों को दिए गए डीजल का रिकॉर्ड तैयार होना चाहिए और शाम को दोबारा गेज लेकर बचे स्टॉक का मिलान किया जाना चाहिए।

रोडवेज का 'तानाशाही सिस्टम': कैश नहीं तो 'सफर' नहीं, डिजिटल व्यवस्था बनी मज़ाक ?आरोप है कि यही जरूरी ‘प्रक्रिया’ कई वर्षों से ‘ठीक ढंग’ से नहीं हो रही थी। अधिकारियों ने जब ‘डीजल विभाग’ के अभिलेख ‘खंगाले’ तो स्टॉक रजिस्टर में ‘अपेक्षित रिकॉर्ड नहीं’ मिलने की ‘बात’ सामने आई। अब मामला सिर्फ कर्मचारियों की लापरवाही तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि ‘डीजल के बड़े पैमाने’ पर ‘गड़बड़झाले’ की ‘आशंका’ भी उठ रही है। हालांकि ‘वास्तविक सच जांच’ के बाद ही सामने आएगा।

रोडवेज डिपो में डीजल चोरी का बड़ा खेल: 14 हजार लीटर गायब, तीन कर्मचारी निलंबितपूर्व में रोडवेज अधिकारियों के अनुसार 8 जुलाई को 14 हजार लीटर ‘डीजल लेकर एक ट्रक बांदा’ डिपो पहुंचा था। यहां डिपो के ‘टैंक में जगह न होने के कारण वह खाली’ नहीं हो सका, लेकिन ‘कर्मचारियों ने उसे 8 जुलाई को ही खाली’ दिखा दिया था। लेकिन ‘वास्तव में टैंकर खाली हुआ या नहीं, इसके प्रमाण दे पाना मुश्किल’ था।  सबसे ‘बड़ा सवाल’ यही है कि अगर ‘स्टॉक की सुबह-शाम गेजिंग और रजिस्टर में एंट्री नियमित’ रूप से ‘नहीं’ हो रही थी, तो यह व्यवस्था ‘एक-दो दिन’ नहीं ‘बल्कि वर्षों’ तक कैसे चलती रही?

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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