
- विनोद मिश्रा
बांदा। दीवारों पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है “निष्प्रयोज्य। अभियंताओं ने “साफ” कह दिया कि ये भवन कभी भी “ढह” सकते हैं, लेकिन “विडंबना” यह है कि इन्हीं “भवनों में रोज सैकड़ों मासूम पढ़ाई करने को मजबूर” हैं। बारिश शुरू होते ही बांदा के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले “हजारों बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल” खड़े हो गए हैं। यदि किसी दिन “कोई जर्जर छत भरभराकर गिर गई, तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी” होगी?
जिले में 1725 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें से 126 विद्यालय भवनों को “जर्जर और निष्प्रयोज्य” घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद अब तक केवल 45 भवनों का पुनर्निर्माण हो सका है, जबकि 81 विद्यालय आज भी नए भवनों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि “एक भी जर्जर भवन की मरम्मत नहीं” कराई गई। यानी “खतरे की जानकारी” होने के बावजूद “मासूमों को जोखिम के बीच पढ़ाया” जा रहा है।
नरैनी ब्लॉक के बरछा बी पूर्व माध्यमिक कन्या विद्यालय में दीवारों पर गहरी दरारें हैं,छत टपकती है और भवन पर “निष्प्रयोज्य” लिखा हुआ है। इसके बावजूद यहां 100 से अधिक छात्राएं पढ़ रही हैं। वहीं पैलानी ब्लॉक के रेंहुटा गांव के प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय का भवन भी पूरी तरह जर्जर है,जहां 166 छात्र तीन कमरों में एक साथ पढ़ने को मजबूर हैं।
धोबिन पुरवा का विद्यालय तीन वर्ष पहले क्षतिग्रस्त होने के बाद “बंद” हो गया। नया भवन अब तक नहीं बन सका, इसलिए ग्रामीणों ने एक खाली मकान में स्कूल संचालित कराया हुआ है। वहीं तिंदवारी ब्लॉक के परसौड़ा कंपोजिट विद्यालय का 1982 में बना भवन “कंडम” घोषित होने के बावजूद आज भी खड़ा है। उसे गिराने की “प्रक्रिया नीलामी निरस्त” होने के बाद “ठंडे बस्ते” में चली गई, जिससे “बच्चों पर खतरा” बना हुआ है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी का कहना है कि 126 भवन पुनर्निर्माण के लिए चिह्नित किए गए थे, जिनमें 45 का निर्माण पूरा हो चुका है। शेष भवनों का निर्माण बजट मिलने पर कराया जाएगा। साथ ही जर्जर भवनों में बच्चों को न बैठाने के निर्देश दिए गए हैं। अब विचारणीय यह है कि जब सरकारी रिकॉर्ड खुद इन भवनों को “निष्प्रयोज्य” घोषित कर चुका है, तो इन्हें ध्वस्त क्यों नहीं किया गया ? नए भवन बनने में वर्षों क्यों लग रहे हैं? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा, या फिर समय रहते मासूमों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी?
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