City News Uttar Pradesh
मौत की 'क्लास' का 'खौफनाक सच': कंडम स्कूलों में 'पढ़ने' को 'मासूम' मजबूर !
उत्तर प्रदेशबुंदेलखंड

मौत की ‘क्लास’ का ‘खौफनाक सच’: कंडम स्कूलों में ‘पढ़ने’ को ‘मासूम’ मजबूर !

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। दीवारों पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है “निष्प्रयोज्य। अभियंताओं ने “साफ” कह दिया कि ये भवन कभी भी “ढह” सकते हैं, लेकिन “विडंबना” यह है कि इन्हीं “भवनों में रोज सैकड़ों मासूम पढ़ाई करने को मजबूर” हैं। बारिश शुरू होते ही बांदा के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले “हजारों बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल” खड़े हो गए हैं। यदि किसी दिन “कोई जर्जर छत भरभराकर गिर गई, तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी” होगी?

मौत की 'क्लास' का 'खौफनाक सच': कंडम स्कूलों में 'पढ़ने' को 'मासूम' मजबूर !जिले में 1725 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें से 126 विद्यालय भवनों को “जर्जर और निष्प्रयोज्य” घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद अब तक केवल 45 भवनों का पुनर्निर्माण हो सका है, जबकि 81 विद्यालय आज भी नए भवनों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि “एक भी जर्जर भवन की मरम्मत नहीं” कराई गई। यानी “खतरे की जानकारी” होने के बावजूद “मासूमों को जोखिम के बीच पढ़ाया” जा रहा है।

मौत की 'क्लास' का 'खौफनाक सच': कंडम स्कूलों में 'पढ़ने' को 'मासूम' मजबूर !नरैनी ब्लॉक के बरछा बी पूर्व माध्यमिक कन्या विद्यालय में दीवारों पर गहरी दरारें हैं,छत टपकती है और भवन पर “निष्प्रयोज्य” लिखा हुआ है। इसके बावजूद यहां 100 से अधिक छात्राएं पढ़ रही हैं। वहीं पैलानी ब्लॉक के रेंहुटा गांव के प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय का भवन भी पूरी तरह जर्जर है,जहां 166 छात्र तीन कमरों में एक साथ पढ़ने को मजबूर हैं।

मौत की 'क्लास' का 'खौफनाक सच': कंडम स्कूलों में 'पढ़ने' को 'मासूम' मजबूर !धोबिन पुरवा का विद्यालय तीन वर्ष पहले क्षतिग्रस्त होने के बाद “बंद” हो गया। नया भवन अब तक नहीं बन सका, इसलिए ग्रामीणों ने एक खाली मकान में स्कूल संचालित कराया हुआ है। वहीं तिंदवारी ब्लॉक के परसौड़ा कंपोजिट विद्यालय का 1982 में बना भवन “कंडम” घोषित होने के बावजूद आज भी खड़ा है। उसे गिराने की “प्रक्रिया नीलामी निरस्त” होने के बाद “ठंडे बस्ते” में चली गई, जिससे “बच्चों पर खतरा” बना हुआ है।

मौत की 'क्लास' का 'खौफनाक सच': कंडम स्कूलों में 'पढ़ने' को 'मासूम' मजबूर !जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी का कहना है कि 126 भवन पुनर्निर्माण के लिए चिह्नित किए गए थे, जिनमें 45 का निर्माण पूरा हो चुका है। शेष भवनों का निर्माण बजट मिलने पर कराया जाएगा। साथ ही जर्जर भवनों में बच्चों को न बैठाने के निर्देश दिए गए हैं। अब विचारणीय यह है कि जब सरकारी रिकॉर्ड खुद इन भवनों को “निष्प्रयोज्य” घोषित कर चुका है, तो इन्हें ध्वस्त क्यों नहीं किया गया ? नए भवन बनने में वर्षों क्यों लग रहे हैं? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा, या फिर समय रहते मासूमों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी?

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 
Subscribe to us on Youtube to watch the latest video news updates.

Notice: This report has been updated by City News Uttar Pradesh Desk, . Full responsibility for the content of this report rests with City News Uttar Pradesh Desk. Neither www.citynewsuttarpradesh.in nor the Editorial Board bears any responsibility.

Related News

यूपी चुनाव 2022 : चित्रकूट में मुख्यमंत्री योगी का बड़ा हमला, बोले- हमने यहां से डकैत किए खत्म, और सपा डकैतों की समर्थक पार्टी है

City News Uttar Pradesh

विधायक विशंभर का मंत्री ‘नंदी’ पर ‘फूटा गुस्सा’: कहा- ‘सौ-सौ चूहे खाय बिल्ली हज को चली’ !

City News Uttar Pradesh

उप मुख्य मंत्री बृजेश पाठक का नूतन बाल समाज द्वारा सम्मान : आमंत्रण पत्र भी सौंपा

डीएम अनुराग का चला चाबुक : सात प्रधानों के अधिकार हो सकते हैं सीज !

City News Uttar Pradesh

चित्रकूटधाम मंडल की सभी ग्राम पंचायतों में 19 जून को चलेगा स्वच्छता अभियान, ग्राम प्रधानों को मंडलायुक्त करेंगे सम्मानित

बांदा जेल हाई एलर्ट : सुबह -शाम पुलिस का फ्लैग मार्च, भोजन से डर !

ब्रेकिंग न्यूज़